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सिमलना और मथाणा में हाथियों ने रौंदी फसल
Updated Wed, 03 Oct 2018 10:28 PM IST
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कोटद्वार। दुगड्डा ब्लाक के दूरस्थ गांव सिमलना तल्ला, बिचला और घाड़ क्षेत्र के मथाणा में हाथियों के झुंड ने धान और मंडुवे की फसल के साथ ही साग सब्जी चौपट कर दी है। किसानों ने शासन-प्रशासन से हाथी की दहशत से निजात दिलाने की मांग की है।
विकासखंड दुगड्डा के सिमलना तल्ला, बिचला और घाड़ क्षेत्र के मथाणा गांव में गत एक महीने से हाथियों का आतंक बना हुआ है। सिमलना तल्ला निवासी दलवीर सिंह रावत, राजेंद्र सिंह और प्रवीन सिंह का कहना है कि रात को हाथी खेतों में खड़ी धान और मंडुवे की फसल को खाने के साथ ही रौंद रहे हैं। लोगों के शोरगुल का भी उन पर कोई असर नहीं हो रहा है। हाथी झुंड लोगों के आंगन में धमक रहा है, जिससे आए दिन अनहोनी की आशंका बनी रती है।
ग्रामीणों ने कहा कि पिछले सप्ताह एक बार वन विभाग की टीम मथाणा पहुंची थी, उस दिन हाथियों के झुंड को जंगल की ओर खदेड़कर लौट गई थी। जबकि हाथी रोज खेतों को चौपट कर रहे हैं। ग्रामीणों ने हाथियों के झुंड को आबादी से दूर खदेड़ने की व्यवस्था के लिए क्षेत्र में टीम तैनात करने और फसलों के नुकसान का मुआवजा देने की मांग उठाई है। लैंसडौंन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज के रेंजर आरपी पंत का कहना है कि शिकायत मिलने पर गांव में टीम भेजी जाती है। सिमलना में हाथियों के आने की कोई सूचना नहीं है। इसे दिखवाया जाएगा।
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विकासखंड दुगड्डा के सिमलना तल्ला, बिचला और घाड़ क्षेत्र के मथाणा गांव में गत एक महीने से हाथियों का आतंक बना हुआ है। सिमलना तल्ला निवासी दलवीर सिंह रावत, राजेंद्र सिंह और प्रवीन सिंह का कहना है कि रात को हाथी खेतों में खड़ी धान और मंडुवे की फसल को खाने के साथ ही रौंद रहे हैं। लोगों के शोरगुल का भी उन पर कोई असर नहीं हो रहा है। हाथी झुंड लोगों के आंगन में धमक रहा है, जिससे आए दिन अनहोनी की आशंका बनी रती है।
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ग्रामीणों ने कहा कि पिछले सप्ताह एक बार वन विभाग की टीम मथाणा पहुंची थी, उस दिन हाथियों के झुंड को जंगल की ओर खदेड़कर लौट गई थी। जबकि हाथी रोज खेतों को चौपट कर रहे हैं। ग्रामीणों ने हाथियों के झुंड को आबादी से दूर खदेड़ने की व्यवस्था के लिए क्षेत्र में टीम तैनात करने और फसलों के नुकसान का मुआवजा देने की मांग उठाई है। लैंसडौंन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज के रेंजर आरपी पंत का कहना है कि शिकायत मिलने पर गांव में टीम भेजी जाती है। सिमलना में हाथियों के आने की कोई सूचना नहीं है। इसे दिखवाया जाएगा।
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