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बंदर और कुतों से बचे, अब बाजार में भी नहीं मिल रहे रैबीज के इंजेक्शन
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कोटद्वार। लोगों को बंदरों और लावारिस कुत्तों से सावधान रहने की जरूरत है। इन दिनों सरकारी अस्पताल तो क्या प्राइवेट क्लीनिक और मेडिकल स्टोरों में भी एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। बेस अस्पताल में अप्रैल से इंजेक्शन खत्म हैं। मरीजों को एंटी रैबीज इंजेक्शन के लिए यूपी के शहरों में भटकना पड़ रहा है। बेस अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोग उपचार कराने के लिए पहुंचते हैं, जिसमें से 10 से 15 मरीज प्रतिदिन बंदर और कुत्ते के काटने के पहुंच रहे हैं, लेकिन लोगों को अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। अप्रैल से आज तक अस्पताल में करीब 600 मरीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच चुके हैं।
लालपुर निवासी गबर सिंह, पदमपुर निवासी सुदीप बौंठियाल, कुंभीचौड़ निवासी पंकज कुमार, गाड़ीघाट निवासी रमेश प्रजापति, जौनपुर निवासी अनिल भट्ट ने स्वास्थ्य विभाग पर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बंदरों और लावारिस कुत्तों की दहशत है। वन विभाग और नगर निगम प्रशासन बंदरों और लावारिस कुत्तों से निजात नहीं दिला पा रहा है। बंदर लोगों के घरों के अंदर घुसकर दहशत फैला रहे हैं। उन्हें भगाने का प्रयास करने पर वे लोगों को काट रहे हैं। सड़कों पर लावारिस कुत्ते राह चलते लोगों को काट रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग भी रैबीज को लेकर गंभीर नहीं है। लोग नजीबाबाद और बिजनौर के मेडिकल स्टोरों से अधिक दामों में इंजेक्शन खरीदने को मजबूर हैं।
उधर, बेस अस्पताल के सीएमएस डा. आरएस चौहान ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशालय के साथ ही संबंधित दवा एजेंसी को 400 वाइल की डिमांड भेजी गई है, लेकिन मार्केट में उपलब्धता नहीं होने के कारण एंटी रैबीज इंजेक्शन की सप्लाई नहीं हो पा रही है। देश की तीन कंपनियां ही रैबीज के इंजेक्शन बनाती हैं, जिसमें से दो सरकार की ओर से बैन हैं। इंजेक्शन प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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लालपुर निवासी गबर सिंह, पदमपुर निवासी सुदीप बौंठियाल, कुंभीचौड़ निवासी पंकज कुमार, गाड़ीघाट निवासी रमेश प्रजापति, जौनपुर निवासी अनिल भट्ट ने स्वास्थ्य विभाग पर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बंदरों और लावारिस कुत्तों की दहशत है। वन विभाग और नगर निगम प्रशासन बंदरों और लावारिस कुत्तों से निजात नहीं दिला पा रहा है। बंदर लोगों के घरों के अंदर घुसकर दहशत फैला रहे हैं। उन्हें भगाने का प्रयास करने पर वे लोगों को काट रहे हैं। सड़कों पर लावारिस कुत्ते राह चलते लोगों को काट रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग भी रैबीज को लेकर गंभीर नहीं है। लोग नजीबाबाद और बिजनौर के मेडिकल स्टोरों से अधिक दामों में इंजेक्शन खरीदने को मजबूर हैं।
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उधर, बेस अस्पताल के सीएमएस डा. आरएस चौहान ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशालय के साथ ही संबंधित दवा एजेंसी को 400 वाइल की डिमांड भेजी गई है, लेकिन मार्केट में उपलब्धता नहीं होने के कारण एंटी रैबीज इंजेक्शन की सप्लाई नहीं हो पा रही है। देश की तीन कंपनियां ही रैबीज के इंजेक्शन बनाती हैं, जिसमें से दो सरकार की ओर से बैन हैं। इंजेक्शन प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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