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मालन, खोह और सुखरो में अवैध खनन बना कारोबार
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कण्वघाटी (कोटद्वार)। सरकारी मशीनरी की मिलीभगत से कोटद्वार क्षेत्र की प्रमुख नदियों मालन, खोह व सुखरो से लेकर सिगड्डी स्रोत में अवैध खनन कारोबार बन गया है। इस अवैध कारोबार से जहां सरकार को राजस्व का चूना लग रहा है, वहीं खननकारी धड़ल्ले से सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने में नहीं हिचक रहे हैं। यही वजह है कि कई बार की शिकायत के बाद भी प्रशासन और संबंधित विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अवैध खनन से मालन नदी के तटवर्ती आबादी को खतरा बना हुआ है।
कोटद्वार क्षेत्र की मालन, खोह, सुखरो से लेकर सिगड्डी स्रोत तक की नदियों में अवैध खनन कारोबार बन गया है। सरकारी सिस्टम की अनदेखी से इन नदियों में उपखनिज चोरी रोजगार का जरिया बन गया है। यही वजह है कि पूरे वर्ष दिन-रात क्षेत्र की नदियों में अवैध खनन का धंधा चलता रहता है। इस साल इस अवैध खनन के कारण वन विकास निगम को मालन गेट में बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। सरकार को लाखों रुपये की रायल्टी देकर वन विकास निगम ने मालन में करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खनन चुगान का पट्टा आवंटित किया, लेकिन धड़ल्ले से हो रहे अवैध खनन के कारण वन निगम के लॉट में रेत, बजरी और बोल्डर खरीदने वालों का टोटा बना रहा। बमुश्किल दो महीने में वन निगम केवल रायल्टी की रकम जुटा पाया। वन निगम के अनुभाग अधिकारी मुलायम सिंह बिष्ट का कहना है कि विभाग की ओर से प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी दी गई है। अवैध खनन ने इस बार निगम को भी चूना लगाया है।
अवैध खनन से केवल सरकार को राजस्व का ही चूना नहीं लग रहा, बल्कि आसपास की आबादी और खेत खलिहानों पर भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि मालन नदी के किनारे बसे कण्वाश्रम, मवाकोट, कोठला, गोरखपुर, नंदपुर, पदमपुर मोटाढांक और देवरामपुर में पिछली बरसात में बड़ी तबाही मची थी। इस बार भी हालात जस के तस बने हैं। तहसीलदार डबल सिंह रावत का कहना है कि अवैध खनन पर अंकुश लगाया जा रहा है।
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कोटद्वार क्षेत्र की मालन, खोह, सुखरो से लेकर सिगड्डी स्रोत तक की नदियों में अवैध खनन कारोबार बन गया है। सरकारी सिस्टम की अनदेखी से इन नदियों में उपखनिज चोरी रोजगार का जरिया बन गया है। यही वजह है कि पूरे वर्ष दिन-रात क्षेत्र की नदियों में अवैध खनन का धंधा चलता रहता है। इस साल इस अवैध खनन के कारण वन विकास निगम को मालन गेट में बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। सरकार को लाखों रुपये की रायल्टी देकर वन विकास निगम ने मालन में करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खनन चुगान का पट्टा आवंटित किया, लेकिन धड़ल्ले से हो रहे अवैध खनन के कारण वन निगम के लॉट में रेत, बजरी और बोल्डर खरीदने वालों का टोटा बना रहा। बमुश्किल दो महीने में वन निगम केवल रायल्टी की रकम जुटा पाया। वन निगम के अनुभाग अधिकारी मुलायम सिंह बिष्ट का कहना है कि विभाग की ओर से प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी दी गई है। अवैध खनन ने इस बार निगम को भी चूना लगाया है।
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अवैध खनन से केवल सरकार को राजस्व का ही चूना नहीं लग रहा, बल्कि आसपास की आबादी और खेत खलिहानों पर भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि मालन नदी के किनारे बसे कण्वाश्रम, मवाकोट, कोठला, गोरखपुर, नंदपुर, पदमपुर मोटाढांक और देवरामपुर में पिछली बरसात में बड़ी तबाही मची थी। इस बार भी हालात जस के तस बने हैं। तहसीलदार डबल सिंह रावत का कहना है कि अवैध खनन पर अंकुश लगाया जा रहा है।
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