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प्रवासियों को गांव और संस्कृति से जोड़े रखने की अनूठी पहल है चाई ग्रामोत्सव
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कोटद्वार। पहाड़ में प्रवासियों को अपने गांव और अपनी संस्कृति से निरंतर जोड़े रखने के लिए चाई ग्रामोत्सव एक प्रेरणा का स्रोत और अनूठी पहल बन गया है। जयहरीखाल ब्लॉक के चाई गांव में हर साल जून माह में होने वाले चाई ग्रामोत्सव में शिरकत करने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में प्रवासी बंधु गांव पहुंचते हैं। तीन दिवसीय इस ग्रामोत्सव को स्थानीय ग्रामीण और प्रवासी धूमधाम से मनाते हैं। ग्रामीण और लोक कलाकार विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। इस वर्ष भी तीन दिवसीय चाई ग्रामोत्सव 10 जून से शुरू हो रहा है।
प्रारंभ से ही इस ग्रामोत्सव के आयोजन से जुड़े डा. पदमेश बुड़ाकोटी बताते हैं कि ग्रामोत्सव की शुरुआत जून 2010 में हुई थी। जब पहली बार गांव के सभी प्रवासी एवं स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर गांव को संवारने का निर्णय लिया था। इसके पीछे ग्रामीणों की मंशा यह थी कि रोजगार की तलाश में पलायन कर चुके लोगों का गांव की जड़ों और संस्कृति से निरंतर जुड़ाव बना रहे। ग्रामोत्सव का मुख्य उद्देश्य यह है कि जो गांव पलायन की मार झेल रहे हैं, उनमें कम से कम सालभर में एक माह के लिए ही सही रौनक लौट सके और घरों के बंद ताले भी खुल सकें। जून माह में स्कूलों में बच्चों की छुट्टियां रहती हैं और पहाड़ों का मौसम भी अच्छा रहता है। ग्रामोत्सव के बहाने प्रवासी रिश्तेदारों और नातेदारों से जहां मेलमिलाप होता है, वहीं गांव छोड़कर गए लोग अपनी पीड़ा और अनुभव बांटते हैं।
पलायन रोकने में ग्रामोत्सव साबित हो रहे मील का पत्थर
कोटद्वार। पौड़ी जिले के कई गांवों में पलायन कर चुके लोगों से मिलने और वापस उन्हें गांव बुलाने के लिए ग्रामोत्सव का आयोजन किया जाने लगा है। चाई की तर्ज पर ग्राम अंगणी, मजकोट, गवांणी, बड़ेथ, ग्वील, मयलगांव में हर वर्ष ग्रामोत्सव का आयोजन होता है।
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प्रारंभ से ही इस ग्रामोत्सव के आयोजन से जुड़े डा. पदमेश बुड़ाकोटी बताते हैं कि ग्रामोत्सव की शुरुआत जून 2010 में हुई थी। जब पहली बार गांव के सभी प्रवासी एवं स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर गांव को संवारने का निर्णय लिया था। इसके पीछे ग्रामीणों की मंशा यह थी कि रोजगार की तलाश में पलायन कर चुके लोगों का गांव की जड़ों और संस्कृति से निरंतर जुड़ाव बना रहे। ग्रामोत्सव का मुख्य उद्देश्य यह है कि जो गांव पलायन की मार झेल रहे हैं, उनमें कम से कम सालभर में एक माह के लिए ही सही रौनक लौट सके और घरों के बंद ताले भी खुल सकें। जून माह में स्कूलों में बच्चों की छुट्टियां रहती हैं और पहाड़ों का मौसम भी अच्छा रहता है। ग्रामोत्सव के बहाने प्रवासी रिश्तेदारों और नातेदारों से जहां मेलमिलाप होता है, वहीं गांव छोड़कर गए लोग अपनी पीड़ा और अनुभव बांटते हैं।
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पलायन रोकने में ग्रामोत्सव साबित हो रहे मील का पत्थर
कोटद्वार। पौड़ी जिले के कई गांवों में पलायन कर चुके लोगों से मिलने और वापस उन्हें गांव बुलाने के लिए ग्रामोत्सव का आयोजन किया जाने लगा है। चाई की तर्ज पर ग्राम अंगणी, मजकोट, गवांणी, बड़ेथ, ग्वील, मयलगांव में हर वर्ष ग्रामोत्सव का आयोजन होता है।
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