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शासन की बेरूखी से खस्ताहाल हुआ ऐता-चरेख मोटर मार्ग
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दुगड्डा (कोटद्वार)। करोड़ों की लागत से बने ऐता-चरेख मोटर मार्ग की हालत तीन साल में ही खस्ता हो गई है। सड़क की डामर जगह-जगह उखड़ गई है। स्कपरों में बनाई गई डाट पुलिया भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे सड़क पर यात्री जान हथेली पर रखकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
दुगड्डा ब्लॉक के अंतर्गत घाड़ क्षेत्र के चरेख, बंगला, धरगांव, उर्तिच्छा, सिमलखेत, मंज्याड़ी, कूरीखाल, लदोखी, सिमलखेत, पाली, रामड़ी, धूराताल, कैंतूगी, भेल सरूड़ा, उमरैला तल्ला व उमरैला मल्ला आदि गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने 22.40 किलोमीटर लंबे ऐता-चरेख मोटर मार्ग के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की थी। डामरीकरण के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सिंचाई खंड कोटद्वार इकाई को 533.74 लाख की धनराशि आवंटित की गई। डामरीकरण कार्य 25 फरवरी 2011 से शुरू हुआ, जिसे 24 अगस्त 2012 तक पूर्ण होना था, लेकिन बजट में देरी के कारण यह मार्ग वर्ष 2015 में बनकर तैयार हुआ।
ग्रामीणों का आरोप है कि आपदा और घटिया गुणवत्ता के चलते सड़क निर्माण के बाद से ही टूटनी लगी थी। विभाग ने जहां सड़क किनारे पहाड़ियों को खोदकर वहां से कच्चा पत्थर निकालकर सड़क में बिछा दिया, वहीं डामर बिछाने के नाम पर तारकोल की हल्की परत डाल दी, जो वर्तमान में पूरी तरह उखड़ चुकी है। ग्रामीण सुरेंद्र सिंह, सुमित द्विवेदी, चंद्रमोहन सिंह, देवेंद्र सिंह, राजेश व मनमोहन सिंह आदि का कहना है कि गुणवत्ता के अभाव में सड़क तीन साल में ही खस्ताहाल स्थिति में पहुंच गई है। सड़क खस्ताहाल होने के कारण मार्ग पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
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पिछले साल भी सड़क की मरम्मत के लिए प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा गया है, लेकिन शासन से धनराशि स्वीकृत नहीं हो पाई। तीन माह पूर्व 80 लाख का प्राक्कलन तैयार कर पुन: शासन को भेजा गया है। जिला प्लान में भी धनराशि स्वीकृत कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन बजट नहीं मिल सका। धनाभाव के कारण मार्ग के अनुरक्षण का कार्य नहीं हो पा रहा है।
-योगेंद्र सिंह, एई पीएमजीएसवाई सिंचाई खंड कोटद्वार
-फोटो
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दुगड्डा ब्लॉक के अंतर्गत घाड़ क्षेत्र के चरेख, बंगला, धरगांव, उर्तिच्छा, सिमलखेत, मंज्याड़ी, कूरीखाल, लदोखी, सिमलखेत, पाली, रामड़ी, धूराताल, कैंतूगी, भेल सरूड़ा, उमरैला तल्ला व उमरैला मल्ला आदि गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने 22.40 किलोमीटर लंबे ऐता-चरेख मोटर मार्ग के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की थी। डामरीकरण के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सिंचाई खंड कोटद्वार इकाई को 533.74 लाख की धनराशि आवंटित की गई। डामरीकरण कार्य 25 फरवरी 2011 से शुरू हुआ, जिसे 24 अगस्त 2012 तक पूर्ण होना था, लेकिन बजट में देरी के कारण यह मार्ग वर्ष 2015 में बनकर तैयार हुआ।
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ग्रामीणों का आरोप है कि आपदा और घटिया गुणवत्ता के चलते सड़क निर्माण के बाद से ही टूटनी लगी थी। विभाग ने जहां सड़क किनारे पहाड़ियों को खोदकर वहां से कच्चा पत्थर निकालकर सड़क में बिछा दिया, वहीं डामर बिछाने के नाम पर तारकोल की हल्की परत डाल दी, जो वर्तमान में पूरी तरह उखड़ चुकी है। ग्रामीण सुरेंद्र सिंह, सुमित द्विवेदी, चंद्रमोहन सिंह, देवेंद्र सिंह, राजेश व मनमोहन सिंह आदि का कहना है कि गुणवत्ता के अभाव में सड़क तीन साल में ही खस्ताहाल स्थिति में पहुंच गई है। सड़क खस्ताहाल होने के कारण मार्ग पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
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पिछले साल भी सड़क की मरम्मत के लिए प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा गया है, लेकिन शासन से धनराशि स्वीकृत नहीं हो पाई। तीन माह पूर्व 80 लाख का प्राक्कलन तैयार कर पुन: शासन को भेजा गया है। जिला प्लान में भी धनराशि स्वीकृत कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन बजट नहीं मिल सका। धनाभाव के कारण मार्ग के अनुरक्षण का कार्य नहीं हो पा रहा है।
-योगेंद्र सिंह, एई पीएमजीएसवाई सिंचाई खंड कोटद्वार
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