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खोह-सुखरौ में पोकलैंड और जेसीबी से हो रहा खनन, ग्रामीणों में आक्रोश
Updated Fri, 09 Mar 2018 10:32 PM IST
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कोटद्वार। गत वर्ष आपदा के दौरान कोटद्वार की नदियों में आए मलबे के निस्तारण और नदियों के चैनलाइजेशन के नाम पर कोटद्वार में खनन का जमकर खेल चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नदियों में पोकलैंड और जेसीबी से चल रहा अंधाधुंध खनन आगामी बरसात में एक बार फिर से भूकटाव और भारी आपदा को जन्म दे सकता है। उधर, कोटद्वार की नदियों का उपखनिज ओवरलोडेड डंपरों से लालढांग वन मोटर मार्ग से ले जाने के कारण कई पुलिया ध्वस्त हो गई हैं। लालढांग के ग्रामीणों ने ओवरलोडेड डंपरों को वापस लौटाते हुए बीते दिन जोरदार प्रदर्शन किया है।
कोटद्वार की खोह और सुखरौ नदी में पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से चल रहा खनन कार्य चल रहा है। नदियों के दोनों ओर के गांवों के लोग रात को भी सो नहीं पा रहे हैं। खनन की शिकायत पुलिस प्रशासन से करने वाले खौफजदा हैं। कई गांवों में लोगों को खनन की शिकायत करने वालों को डराए धमकाए जाने की बातें प्रकाश में आई हैं। छोटी सी शिकायत पर रेत बजरी की ट्रैक्टर-ट्राली जब्त करने वाले पुलिस और प्रशासन पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। दिन से ज्यादा खनन रात के अंधेरे में हो रहा है।
उत्तराखंड आंदोलनकारी राष्ट्रीय मोर्चा के प्रवक्ता विजय ध्यानी, महेश चौधरी, सूरज कांति, परमानंद जोशी, कुंवर सिंह रावत व महेश जोशी का कहना है कि कोटद्वार में हरिद्वार, रुड़की और यूपी की तर्ज पर हो रहा खनन आने वाली बरसात में आपदा को आमंत्रण दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नदियों के चैनलाइज की जरूरत दूसरे क्षेत्रों में है, पट्टे वाली जगहों पर नहीं। उपखनिजों के ओवरलोड डंपरों से चिलरखाल-लालढांग मार्ग पर कई पुलिया ध्वस्त हो गई है। लालढांग के ग्रामीणों ने बीते दिन ओवरलोडेड डंपरों को लौटाते हुए प्रदर्शन किया है।
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नदियों को नियमानुसार चैनलाइज करने के लिए शासन की ओर से पट्टे आवंटित किए गए हैं। ओवरलोडेड डंपर और रात को खनन होने की जानकारी उन्हें नहीं है। खनन के लिए विभागीय कमेटी बनाई गई है।
-राकेश तिवारी, एसडीएम कोटद्वार।
-फोटो
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कोटद्वार की खोह और सुखरौ नदी में पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से चल रहा खनन कार्य चल रहा है। नदियों के दोनों ओर के गांवों के लोग रात को भी सो नहीं पा रहे हैं। खनन की शिकायत पुलिस प्रशासन से करने वाले खौफजदा हैं। कई गांवों में लोगों को खनन की शिकायत करने वालों को डराए धमकाए जाने की बातें प्रकाश में आई हैं। छोटी सी शिकायत पर रेत बजरी की ट्रैक्टर-ट्राली जब्त करने वाले पुलिस और प्रशासन पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। दिन से ज्यादा खनन रात के अंधेरे में हो रहा है।
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उत्तराखंड आंदोलनकारी राष्ट्रीय मोर्चा के प्रवक्ता विजय ध्यानी, महेश चौधरी, सूरज कांति, परमानंद जोशी, कुंवर सिंह रावत व महेश जोशी का कहना है कि कोटद्वार में हरिद्वार, रुड़की और यूपी की तर्ज पर हो रहा खनन आने वाली बरसात में आपदा को आमंत्रण दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नदियों के चैनलाइज की जरूरत दूसरे क्षेत्रों में है, पट्टे वाली जगहों पर नहीं। उपखनिजों के ओवरलोड डंपरों से चिलरखाल-लालढांग मार्ग पर कई पुलिया ध्वस्त हो गई है। लालढांग के ग्रामीणों ने बीते दिन ओवरलोडेड डंपरों को लौटाते हुए प्रदर्शन किया है।
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नदियों को नियमानुसार चैनलाइज करने के लिए शासन की ओर से पट्टे आवंटित किए गए हैं। ओवरलोडेड डंपर और रात को खनन होने की जानकारी उन्हें नहीं है। खनन के लिए विभागीय कमेटी बनाई गई है।
-राकेश तिवारी, एसडीएम कोटद्वार।
-फोटो