{"_id":"5c0d47a8bdec22414d550c69","slug":"141544374184-kotdwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मवाकोट के घराट गदेरे से हजारों की आबादी को खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मवाकोट के घराट गदेरे से हजारों की आबादी को खतरा
Updated Sun, 09 Dec 2018 10:19 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोटद्वार। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की लापरवाही का खामियाजा मवाकोट क्षेत्र के चार वार्डों की हजारों की आबादी को भुगतना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में स्थित मवाकोट, कोटला, नंदपुर, नींबूचौड़, घमंडपुर और शिवराजपुर के लोग लगातार दो साल से आ रही आपदा से नहीं उबर पाए हैं। हालत यह है कि चार अगस्त, 2017 को आई आपदा में मवाकोट कोटला स्थित घराट गदेरे में आए मलबे को अभी तक नहीं हटाया जा सका है।
चार अगस्त, 2017 को मवाकोट स्थित घराट गदेरे के ऊपर की पहाड़ियों में बादल फटने से पूरा मलबा घराट के पीछे पुराने हरिद्वार मार्ग पर आ गया था। गदेरे के मुहाने पर भारी बोल्डर और मलबा जमा होने से गदेरा अपने मूल स्वरूप से डायवर्ट होकर गेंद मेला मैदान की ओर बहने लगा। तब बाढ़ का पानी मवाकोट जगदेव नाले से होता हुआ आबादी में घुस गया, जिससे मवाकोट, नंदपुर, घमंडपुर, नींबूूचौड़, खदरी और खूनीबड़ में भारी तबाही मची। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि उनकी ओर से गदेरे से मलबा और बोल्डर हटाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस साल गत 25 अगस्त को भी भारी बारिश के चलते चार वार्डों की हजारों की आबादी बाढ़ से प्रभावित रही। ग्रामीणों की सूचना पर लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज के अधिकारी मौके पर तो पहुंचे, लेकिन उन्होंने न तो अब तक मलबा हटवाया और न ही बोल्डर हटवाए। सामाजिक कार्यकर्ता भवानी दत्त लखेड़ा, पूर्व प्रधान बाबू राम, सुमन सिंह व हरेंद्र जोशी ने बताया कि 18 अगस्त को ग्रामीणों ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा था। इसमें 24 अक्तूबर, 2017 को सीएम के विशेष कार्याधिकारी ऊर्बा दत्त भट्ट ने जिला प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। 10 अप्रैल, 2018 को वन मंत्री और 13 अप्रैल 2017 को लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज के अधिकारी को पत्र सौंपा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्रवासी इस संवेदनशील मसले को प्रधानमंत्री कार्यालय और उत्तराखंड सरकार के समाधान पोर्टल में उठा चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई न होने से क्षेत्रवासियों में आक्रोश व्याप्त है।
विज्ञापन
लैंसडौंन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज अधिकारी आरपी पंत का कहना है कि मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीन विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। उच्चाधिकारियों के संज्ञान में डाला गया है। जेसीबी मशीन उपलब्ध होते ही मलबे को हटाकर नाले का मुंह खोल दिया जाएगा।
-फोटो
विज्ञापन
चार अगस्त, 2017 को मवाकोट स्थित घराट गदेरे के ऊपर की पहाड़ियों में बादल फटने से पूरा मलबा घराट के पीछे पुराने हरिद्वार मार्ग पर आ गया था। गदेरे के मुहाने पर भारी बोल्डर और मलबा जमा होने से गदेरा अपने मूल स्वरूप से डायवर्ट होकर गेंद मेला मैदान की ओर बहने लगा। तब बाढ़ का पानी मवाकोट जगदेव नाले से होता हुआ आबादी में घुस गया, जिससे मवाकोट, नंदपुर, घमंडपुर, नींबूूचौड़, खदरी और खूनीबड़ में भारी तबाही मची। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि उनकी ओर से गदेरे से मलबा और बोल्डर हटाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
इस साल गत 25 अगस्त को भी भारी बारिश के चलते चार वार्डों की हजारों की आबादी बाढ़ से प्रभावित रही। ग्रामीणों की सूचना पर लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज के अधिकारी मौके पर तो पहुंचे, लेकिन उन्होंने न तो अब तक मलबा हटवाया और न ही बोल्डर हटवाए। सामाजिक कार्यकर्ता भवानी दत्त लखेड़ा, पूर्व प्रधान बाबू राम, सुमन सिंह व हरेंद्र जोशी ने बताया कि 18 अगस्त को ग्रामीणों ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा था। इसमें 24 अक्तूबर, 2017 को सीएम के विशेष कार्याधिकारी ऊर्बा दत्त भट्ट ने जिला प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। 10 अप्रैल, 2018 को वन मंत्री और 13 अप्रैल 2017 को लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज के अधिकारी को पत्र सौंपा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्रवासी इस संवेदनशील मसले को प्रधानमंत्री कार्यालय और उत्तराखंड सरकार के समाधान पोर्टल में उठा चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई न होने से क्षेत्रवासियों में आक्रोश व्याप्त है।
विज्ञापन
लैंसडौंन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज अधिकारी आरपी पंत का कहना है कि मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीन विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। उच्चाधिकारियों के संज्ञान में डाला गया है। जेसीबी मशीन उपलब्ध होते ही मलबे को हटाकर नाले का मुंह खोल दिया जाएगा।
-फोटो