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कोटद्वार का बांस प्रशिक्षण केंद्र पहुंचा गुमनामी के अंधेरे में
Updated Wed, 31 Jan 2018 10:40 PM IST
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कोटद्वार। उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद का कोटद्वार स्थित बांस व रामबांस श्रेष्ठता एवं प्रचार-प्रसार केंद्र अनदेखी के कारण गुमनामी के अंधेरे में है। वर्तमान में केंद्र की हालत यह है कि इसमें करीब 15 लाख रुपये की लागत की लगी मशीनें शोपीस बनकर धूल फांक रही हैं।
उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद की ओर से 2005 में बांस के माध्यम से बेरोजगारों को रोजगार देने के उद्देश्य को लेकर केंद्र की स्थापना की गई थी। जिन योजनाओं को लेकर कोटद्वार स्थित बांस व रेशा प्रशिक्षण केंद्र को शुरू किया गया था। वे परिषद की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते यह परवान नहीं चढ़ रही हैं। आलम यह है कि संविदा में बांस केंद्र की देखरेख में मात्र एक ही व्यक्ति ट्रेनर रह गया है।
बांस केंद्र के मास्टर ट्रेनर महावीर सिंह का कहना है कि पनियाली कोटद्वार स्थित बांस केंद्र के शुरुआत में अनेक लोग बांस प्रशिक्षण के लिए केंद्र में आए थे। साथ ही कई महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ ही रोजगार भी मिला था, लेकिन वर्तमान में बेरोजगारों को कम मानदेय दिए जाने के कारण केंद्र में प्रशिक्षण लेने के लिए कोई नहीं पहुंच रहा है। बताया कि केंद्र में लगी करीब 15 लाख रुपये की मशीनें चार कोल सैटप, गैसी फायर, ट्रीटमेंट प्लांट, मल्टी पर्पज प्लेनर, अगर बत्ती सैटप आदि लगी हुई हैं, जो कर्मचारी न होने के कारण बंद पड़ी हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र में शुरुआती दौर में लगभग 30 लोग काम करते थे, लेकिन वर्तमान में केंद्र में काम करने को एक भी व्यक्ति नहीं है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
केंद्र सरकार से बजट नहीं मिलने के कारण बांस प्रशिक्षण में व्यवधान आ रहा है। धनराशि आवंटित होने के बाद ही बांस केंद्र में सभी रुकी हुई योजनाओं पर कार्य शुरू किया जाएगा।
- एके दत्त, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, बांस एवं रेशा विकास परिषद देहरादून
-फोटो
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उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद की ओर से 2005 में बांस के माध्यम से बेरोजगारों को रोजगार देने के उद्देश्य को लेकर केंद्र की स्थापना की गई थी। जिन योजनाओं को लेकर कोटद्वार स्थित बांस व रेशा प्रशिक्षण केंद्र को शुरू किया गया था। वे परिषद की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते यह परवान नहीं चढ़ रही हैं। आलम यह है कि संविदा में बांस केंद्र की देखरेख में मात्र एक ही व्यक्ति ट्रेनर रह गया है।
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बांस केंद्र के मास्टर ट्रेनर महावीर सिंह का कहना है कि पनियाली कोटद्वार स्थित बांस केंद्र के शुरुआत में अनेक लोग बांस प्रशिक्षण के लिए केंद्र में आए थे। साथ ही कई महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ ही रोजगार भी मिला था, लेकिन वर्तमान में बेरोजगारों को कम मानदेय दिए जाने के कारण केंद्र में प्रशिक्षण लेने के लिए कोई नहीं पहुंच रहा है। बताया कि केंद्र में लगी करीब 15 लाख रुपये की मशीनें चार कोल सैटप, गैसी फायर, ट्रीटमेंट प्लांट, मल्टी पर्पज प्लेनर, अगर बत्ती सैटप आदि लगी हुई हैं, जो कर्मचारी न होने के कारण बंद पड़ी हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र में शुरुआती दौर में लगभग 30 लोग काम करते थे, लेकिन वर्तमान में केंद्र में काम करने को एक भी व्यक्ति नहीं है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
केंद्र सरकार से बजट नहीं मिलने के कारण बांस प्रशिक्षण में व्यवधान आ रहा है। धनराशि आवंटित होने के बाद ही बांस केंद्र में सभी रुकी हुई योजनाओं पर कार्य शुरू किया जाएगा।
- एके दत्त, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, बांस एवं रेशा विकास परिषद देहरादून
-फोटो