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घर रहने लायक नहीं, 320 आपदा पीड़ित राहत कैंप में रहने को मजबूर

Fri, 11 Aug 2017 10:04 PM IST
Updated Fri, 11 Aug 2017 10:04 PM IST
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घर रहने लायक नहीं, 320 आपदा पीड़ित राहत कैंप में रहने को मजबूर
कोटद्वार। गत 3/4 अगस्त की रात शहर से लेकर गांव तक आई आपदा की चपेट में आए रिफ्यूजी कालोनी, कौड़िया और काशीरामपुर के 320 आपदा पीड़ित एक सप्ताह बाद भी राहत कैंप में दिन गुजार रहे हैं। आपदा पीड़ितों का कहना है कि उनके घर मलबे से पटे हैं, जो रहने लायक नहीं बचे। ऐसे में उनके सामने राहत कैंप में रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। कई लोग दिन में अपने घरों का मलबा हटाने के लिए जा रहे हैं, लेकिन दिन और रात में भोजन और सोने के लिए राहत कैंपों में आ रहे हैं।
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रिफ्यूजी कालोनी के साथ ही कौड़िया और काशीरामपुर का इलाका आपदा से सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। यहां के लोगों के पास रहने और खाने की व्यवस्था न होने के कारण उन्होंने प्रशासन की ओर से लगाए गए कैंपों में शरण ली हुई है। रिफ्यूजी कालोनी के प्रभावितों ने ठेकेदार धर्मशाला से हटकर गोविंदनगर स्थित गुरुद्वारे में शरण ली है। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे में लगे राहत शिविर में प्रशासन ने एक बार राशन मुहैया कर इतिश्री कर दी है, जबकि जीआईसी कोटद्वार में काशीरामपुर और कौड़िया के प्रभावितों के लिए लगे राहत शिविर में वन निगम द्वारा राशन मुहैया कराया जा रहा है।
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गुरुद्वारे में बाढ़ प्रभावितों के लिए लंगर की सेवा कर रहे राकेश आहूजा, महेंद्र सिंह और नगर सभासद विनय भाटिया ने बताया कि गुरुद्वारे में लगे राहत कैंप में 53 परिवारों के करीब 150 लोग रह रहे हैं। स्थानीय लोगों की मदद से ही यहां राशन की व्यवस्था की जा रही है। जीआईसी कोटद्वार में लगे राहत शिविर में कौड़िया और काशीरामपुर गांव के करीब 170 लोग रह रहे हैं। यहां एक चिकित्सा कैंप भी लगाया गया है, जहां डा. विजय सिंह राणा हर रोज 80 से 100 लोगों का उपचार कर दवाइयां उपलब्ध करा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कौड़िया, काशीरामपुर, आमपड़ाव और हरसिंहपुर में दो मोबाइल चिकित्सा वैन चलाई जा रही हैं, जिसमें रोजाना 200 मरीजों का उपचार किया जा रहा है। उपजिलाधिकारी राकेश तिवारी ने बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्र में सरकारी मशीनरी ने पूरी ताकत झोंक दी है।
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