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मालन, सुखरौ में 14 साल से खनन की अनुमति का इंतजार

Wed, 06 Apr 2016 10:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटद्वार Updated Wed, 06 Apr 2016 10:29 PM IST
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क्षेत्र की प्रमुख नदियों मालन, सुखरौं और खोह में खनन, चुगान की अनुमति मिलने में हो रही लेटलतीफी से जहां खनन व्यवसाय से जुड़े लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है, वहीं उपखनिज की बढ़ती मांग के चलते अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है। सरकारी मशीनरी और खननकारियों के बीच संघर्ष के मामले बढ़ रहे हैं। सरकारी निर्माण कार्यों पर भी इसका विपरीत असर पड़ा है।
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लोगों का कहना है कि नदियों में खनन और चुगान की अनुमति मिलने से जहां अवैध खनन पर लगाम लगती वहीं सरकार को करोड़ों का राजस्व भी मिलता।
क्षेत्रीय विधायक और तत्कालीन मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने 24 नवंबर, 2015 को कोटद्वार में प्रेस कांफ्रेंस कर एक हफ्ते में मालन नदी में खनन चुगान खुलने की बात कही थी। कहा था कि सारी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए दिल्ली की एक कंसलटेंट कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है। आज पांच महीने बीच चुके हैं, मालन नदी में खनन चुगान की अनुमति का क्षेत्रवासियों को बेसब्री से इंतजार है। ट्रैक्टर यूनियन अध्यक्ष भास्कर बड़थ्वाल, सुदर्शन भंडारी, ग्रामीण आरएल कुकरेती, एमएम जोशी का कहना है कि नदियां खुल जाती तो जहां सैकड़ों लोगों केे रोजगार मिलता, वहीं अवैध खनन की नौबत ही नहीं आती।
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कोटद्वार की नदियों में 14 साल से बंद है खनन, चुगान
वर्ष 2002 से कोटद्वार क्षेत्र की नदियों में खनन नहीं खुला, जिससे अवैध खनन को ही बढ़ावा मिल रहा है। लंबे समय से लोग खनन खुलने का इंतजार कर रहे हैं। इससे जहां सरकार को राजस्व मिलेगा, वहीं नियोजित ढंग से चुगान होगा। खनन पर प्रतिबंध से जहां नदियों का तल ऊंचा हो रहा है, वहीं इस पर आधारित लोगों को रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है।
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अंतर्राज्यीय सीमा से जुड़ी नदियों में खनन, चुगान के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है। राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और फारेस्ट एडवाइजरी कमेटी ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी है। खनन से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन (ईआईए) की प्रक्रिया चल रही है। राज्य सरकार और वन निगम की ओर से सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। सुखरौ नदी में खनन, चुगान की अनुमति में थोड़ा देर लग सकती है, लेकिन मालन की अनुमति जल्द मिलने की उम्मीद है।
-पीएस श्रीवास्तव, (आईएफएस) क्षेत्रीय प्रबंधक वन विकास निगम कोटद्वार
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