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संशोधित-दस अक्तूबर तक खुल जाएगा मालन नदी में खनन...
Updated Mon, 02 Oct 2017 10:47 PM IST
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कोटद्वार। मानसून सत्र खत्म होने के बाद अब 10 अक्तूबर तक मालन नदी में खनन शुरू हो जाएगा। खनन खुलवाने के लिए जहां जिले के खनन विभाग ने सर्वे कार्य पूरा कर लिया, वहीं अब भारतीय मृदा एवं जल प्रबंधन संस्थान देहरादून के सर्वे का इंतजार किया जा रहा है। सितंबर अंतिम सप्ताह तक बारिश के कारण सर्वे में हुई देरी से एक अक्तूबर से मालन को खनन के लिए नहीं खोला जा सका है। दो माह तक चले खनन और चुगान को 31 मई को मानसून सत्र के लिए बंद कर दिया गया था। मानसून खत्म होने के बाद एक अक्तूबर को फिर से नदी को खनन के लिए खोला जाना था, लेकिन सर्वे कराने में उत्तराखंड वन विकास निगम को थोड़ा विलंब हो गया। वन विकास निगम के प्रभागीय विक्रय प्रबंधक राजेंद्र चौधरी का कहना है कि मानसून सत्र खत्म होने के बाद एक अक्तूबर को खनन खुलवाने के लिए जिलास्तर पर कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की गाइड लाइन के अनुसार हर मानसून सत्र के बाद नदी में उपखनिज सामग्री का सर्वे भारतीय मृदा एवं जल प्रबंधन संस्थान देहरादून से कराया जाना आवश्यक है। सितंबर के अंत में हुई बारिश के चलते संस्थान ने सर्वे कार्य कुछ दिनों के लिए टाल दिया था। जिलास्तरीय सर्वे कार्य पूरा होने के बाद अब जल्द ही संस्थान भी सर्वे कर देगा। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि 10 अक्तूबर से मालन में खनन कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
गत 22 मार्च को 13 साल बाद खुला था मालन में खनन-चुगान
कोटद्वार। क्षेत्र की मालन, सुखरौ और खोह नदियों में खनन खुलवाने के लिए उत्तराखंड सरकार की ओर से कई साल से प्रयास चल रहे थे, लेकिन सरकार को खनन खुलवाने में पूरे 13 साल लग गए। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से इस मामले में हुई जनसुनवाई, पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्याकंन और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में काफी समय लग गया। खोह और सुखरो नदियों में तो खनन नहीं खुल सका, लेकिन गत 22 मार्च को मालन नदी में खनन की अनुमति प्राप्त हो गई। खनन खुलने के सात दिन बाद ही नैनीताल हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका पर सुनवाई के बाद मिले आदेश पर 28 मार्च को खनन बंद करना पड़ा था, जिसमें राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया और 12 अप्रैल को फिर से मालन नदी में खनन और चुगान शुरू हो गया था, जो मानसून सत्र शुरू होने से पहले 31 मई तक चला।
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गत 22 मार्च को 13 साल बाद खुला था मालन में खनन-चुगान
कोटद्वार। क्षेत्र की मालन, सुखरौ और खोह नदियों में खनन खुलवाने के लिए उत्तराखंड सरकार की ओर से कई साल से प्रयास चल रहे थे, लेकिन सरकार को खनन खुलवाने में पूरे 13 साल लग गए। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से इस मामले में हुई जनसुनवाई, पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्याकंन और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में काफी समय लग गया। खोह और सुखरो नदियों में तो खनन नहीं खुल सका, लेकिन गत 22 मार्च को मालन नदी में खनन की अनुमति प्राप्त हो गई। खनन खुलने के सात दिन बाद ही नैनीताल हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका पर सुनवाई के बाद मिले आदेश पर 28 मार्च को खनन बंद करना पड़ा था, जिसमें राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया और 12 अप्रैल को फिर से मालन नदी में खनन और चुगान शुरू हो गया था, जो मानसून सत्र शुरू होने से पहले 31 मई तक चला।
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