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बाल विज्ञान कांग्रेस के प्रोजेक्ट निर्माण की बारिकियां बताई
Updated Tue, 19 Sep 2017 10:19 PM IST
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कोटद्वार। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस विकास खंड पाबौ में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें विकासखंड के 30 विद्यालयों ने हिस्सा लिया और राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रोजेक्ट निर्माण की बारीकियां सीखीं।
कार्यशाला का आयोजन खंड शिक्षा अधिकारी पाबौ शिव शंकर पटेल की अध्यक्षता में किया गया। परितोष रावत ने बताया कि जिनका ऑनलाइन पंजीकरण हुआ है, केवल उनका ही शोध पत्र स्वीकार किया जाएगा। 25वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस विकास का मुख्य विषय संधारणीय विकास के लिए विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार के अंर्तगत आठ उपविषय प्राकृतिक संसाधनों और प्रबंधन, खाद्य एवं कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं पोषण, जीवन पद्धतियां एवं आजीविका, आपदा प्रबंधन, परंपरागत ज्ञान पद्धतियां विकलांग व्यक्तियों तक पहुंच विषयों पर बाल शोधार्थी कार्य कर सकते हैं। परितोष रावत ने कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे शिक्षकों को इसकी बारीकियों के बारे में बताया।
खंड शिक्षा अधिकारी पाबौ शिवशंकर पटेल ने कहा कि विद्यालयों में विज्ञान विषय के प्रति छात्रों में सजगता और जागरूकता बनाना उद्देश्य होना चाहिए। शिक्षकों को इस कार्य के लिए छात्रों को प्रोत्साहित करना चाहिए। कार्यशाला में प्रधानाचार्य अमित कठैत, सुशील चंद्र महेश पोखरियाल सुनील बमराड़ा, शैलेंद्र प्रताप सिंह, देवकी नंदन बहुगुणा, रजनीश सेमवाल आदि मौजूद रहे। कार्यशाला का संचालन सुशील चंद्र उनियाल ने किया।
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कार्यशाला का आयोजन खंड शिक्षा अधिकारी पाबौ शिव शंकर पटेल की अध्यक्षता में किया गया। परितोष रावत ने बताया कि जिनका ऑनलाइन पंजीकरण हुआ है, केवल उनका ही शोध पत्र स्वीकार किया जाएगा। 25वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस विकास का मुख्य विषय संधारणीय विकास के लिए विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार के अंर्तगत आठ उपविषय प्राकृतिक संसाधनों और प्रबंधन, खाद्य एवं कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं पोषण, जीवन पद्धतियां एवं आजीविका, आपदा प्रबंधन, परंपरागत ज्ञान पद्धतियां विकलांग व्यक्तियों तक पहुंच विषयों पर बाल शोधार्थी कार्य कर सकते हैं। परितोष रावत ने कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे शिक्षकों को इसकी बारीकियों के बारे में बताया।
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खंड शिक्षा अधिकारी पाबौ शिवशंकर पटेल ने कहा कि विद्यालयों में विज्ञान विषय के प्रति छात्रों में सजगता और जागरूकता बनाना उद्देश्य होना चाहिए। शिक्षकों को इस कार्य के लिए छात्रों को प्रोत्साहित करना चाहिए। कार्यशाला में प्रधानाचार्य अमित कठैत, सुशील चंद्र महेश पोखरियाल सुनील बमराड़ा, शैलेंद्र प्रताप सिंह, देवकी नंदन बहुगुणा, रजनीश सेमवाल आदि मौजूद रहे। कार्यशाला का संचालन सुशील चंद्र उनियाल ने किया।
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