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भाबर के पेयजल में हानिकारक कैमिकल, नहीं हो रही जांच
Updated Tue, 11 Dec 2018 10:11 PM IST
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कोटद्वार। भाबर की अधिकतर आबादी पेयजल के साथ हानिकारक केमिकल भी पी रही है। पानी को उबालने पर यह केमिकल बर्तन की सतह और किनारों पर जम रहा है। क्षेत्रवासी लंबे समय से पेयजल और केमिकल की जांच कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। भाबर क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नागरिकों ने जल संस्थान पर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का आरोप लगाया है।
भाबर के उमरावपुर निवासी सेवानिवृत्त बीएसएनएल अधिकारी मोहन सिंह रावत, चंद्रपाल सिंह व राजेंद्र सिंह नेगी समेत कई लोगों ने बताया कि अधिकतर नलकूपों से मिलने वाले पेयजल में हानिकारक केमिकल मिला हुआ है। उन्होंने बताया कि पानी को गरम करने पर यह बात प्रमाणित हो रही है। उनका कहना है कि गरम पानी वाले बर्तन की तली पर केमिकल्स की परत जम रही है। उन्होंने इस केमिकल को एकत्रित कर दिसंबर 2017 में अधिशासी अभियंता जल संस्थान कोटद्वार को सौंपा, लेकिन, इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने केमिकल का सैंपल भरकर 14 मई 2018 को महाप्रबंधक जल संस्थान पौड़ी को भेजा। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने अगस्त, 2018 में पुन: सैंपल जांच के लिए महाप्रबंधक को भेजा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका आरोप है कि विभागीय अधिकारी जनस्वास्थ्य से जुड़े इस मसले पर गंभीर नहीं हैं। उनका कहना है कि उत्तरी झंडीचौड़ स्थित रामलीला मैदान वाले ट्यूबवेल से दूषित पेयजल आपूर्ति हो रही है। क्षेत्र के लोग पेट की बीमारियों और पथरी के शिकार हो रहे हैं।
उधर, जल संस्थान कोटद्वार के अधिशासी अभियंता एलसी रमोला का कहना है कि सैंपल की जांच कराई गई थी। जांच में पानी में कैल्शियम की मात्रा पाई गई, लेकिन पानी पीने योग्य है, जिससे पेयजल की सुचारु आपूर्ति की जा रही है।
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भाबर के उमरावपुर निवासी सेवानिवृत्त बीएसएनएल अधिकारी मोहन सिंह रावत, चंद्रपाल सिंह व राजेंद्र सिंह नेगी समेत कई लोगों ने बताया कि अधिकतर नलकूपों से मिलने वाले पेयजल में हानिकारक केमिकल मिला हुआ है। उन्होंने बताया कि पानी को गरम करने पर यह बात प्रमाणित हो रही है। उनका कहना है कि गरम पानी वाले बर्तन की तली पर केमिकल्स की परत जम रही है। उन्होंने इस केमिकल को एकत्रित कर दिसंबर 2017 में अधिशासी अभियंता जल संस्थान कोटद्वार को सौंपा, लेकिन, इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने केमिकल का सैंपल भरकर 14 मई 2018 को महाप्रबंधक जल संस्थान पौड़ी को भेजा। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने अगस्त, 2018 में पुन: सैंपल जांच के लिए महाप्रबंधक को भेजा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका आरोप है कि विभागीय अधिकारी जनस्वास्थ्य से जुड़े इस मसले पर गंभीर नहीं हैं। उनका कहना है कि उत्तरी झंडीचौड़ स्थित रामलीला मैदान वाले ट्यूबवेल से दूषित पेयजल आपूर्ति हो रही है। क्षेत्र के लोग पेट की बीमारियों और पथरी के शिकार हो रहे हैं।
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उधर, जल संस्थान कोटद्वार के अधिशासी अभियंता एलसी रमोला का कहना है कि सैंपल की जांच कराई गई थी। जांच में पानी में कैल्शियम की मात्रा पाई गई, लेकिन पानी पीने योग्य है, जिससे पेयजल की सुचारु आपूर्ति की जा रही है।
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