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भारी बारिश के अलर्ट से सहमे कोटद्वार के बाढ़ प्रभावित
Updated Fri, 31 Aug 2018 10:49 PM IST
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कोटद्वार। एक से तीन सितंबर तक भारी बारिश के अलर्ट से कोटद्वारवासी सहमे हुए हैं। पनियाली गदेरा, गिवईंस्रोत, खोह, सुखरो, मालन से लेकर भाबर के तेलीस्रोत गदेरे के तटवर्ती गांवों में रहने वाले लोग खौफजदा हैं। मौसम विभाग के अलर्ट पर नगर निगम और प्रशासन की ओर से लोगों को लाउडस्पीकर लगाकर सचेत कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर दी गई है।
मौसम विभाग के बाद प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन का एक से तीन सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट आम जनता तक पहुंच गया है। नगर निगम की ओर से भोंपू लगाकर लोगों को सचेत किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह तो दे रहा है, लेकिन गिवईंस्रोत, पनियाली गदेरे से किनारे की आबादी, खोह तट पर बसे ग्रास्टनगंज, रतनपुर कुंभीचौड़, सुखरौ, मालन नदियों से होने वाले भूकटाव रोकने को कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। गत वर्ष जहां पनियाली और गिवाईं स्रोत गदेरे की बाढ़ से पूरा शहर प्रभावित रहा, वहीं इस बार भी दो आवासों को जमींदोज करने के साथ बाढ़ ने एक महिला की जान ले ली। स्थानीय महिला नेता आशा डबराल व मंजू नैथानी का कहना है कि पनियाली गदेरे पर अतिक्रमण, विभागों की अकर्मण्यता का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकारी तंत्र पिछली आपदा से सबक लेते हुए पनियाली गदेरे से अतिक्रमण हटाकर इसका डाइवर्जन कर लेता तो लोगों को दूसरी बार बाढ़ का सामना नहीं करना पड़ता। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चंद्रमोहन खर्कवाल, निंबूचौड़ के विनोद रावत और उमेश नौटियाल ने शासन और प्रशासन की ओर से भूमि कटाव रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। तहसीलदार सुनील राज का कहना है कि कोटद्वार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को दस सेक्टरों में बांटकर राहत और बचाव कार्य संचालित किए जा रहे हैं।
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मौसम विभाग के बाद प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन का एक से तीन सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट आम जनता तक पहुंच गया है। नगर निगम की ओर से भोंपू लगाकर लोगों को सचेत किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह तो दे रहा है, लेकिन गिवईंस्रोत, पनियाली गदेरे से किनारे की आबादी, खोह तट पर बसे ग्रास्टनगंज, रतनपुर कुंभीचौड़, सुखरौ, मालन नदियों से होने वाले भूकटाव रोकने को कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। गत वर्ष जहां पनियाली और गिवाईं स्रोत गदेरे की बाढ़ से पूरा शहर प्रभावित रहा, वहीं इस बार भी दो आवासों को जमींदोज करने के साथ बाढ़ ने एक महिला की जान ले ली। स्थानीय महिला नेता आशा डबराल व मंजू नैथानी का कहना है कि पनियाली गदेरे पर अतिक्रमण, विभागों की अकर्मण्यता का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकारी तंत्र पिछली आपदा से सबक लेते हुए पनियाली गदेरे से अतिक्रमण हटाकर इसका डाइवर्जन कर लेता तो लोगों को दूसरी बार बाढ़ का सामना नहीं करना पड़ता। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चंद्रमोहन खर्कवाल, निंबूचौड़ के विनोद रावत और उमेश नौटियाल ने शासन और प्रशासन की ओर से भूमि कटाव रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। तहसीलदार सुनील राज का कहना है कि कोटद्वार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को दस सेक्टरों में बांटकर राहत और बचाव कार्य संचालित किए जा रहे हैं।
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