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मॉडल बनना था, अनदेखी से जर्जरहाल हुआ बेंबो हट
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कोटद्वार। उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद की ओर से पनियाली स्थित बांस प्रशिक्षण केंद्र में लाखों रुपये की लागत से बनाई गई बैंबू हट अनदेखी के चलते जर्जर हो गई है। इस बैंबू हट में शुरुआती दौर में कई कार्यक्रम और गोष्ठियों का आयोजन हुआ, लेकिन समय के साथ परिषद ने इसकी सुध नहीं ली।
कोटद्वार के पनियाली स्थित बांस व रामबांस श्रेष्ठता एवं प्रचार-प्रसार केंद्र के मास्टर ट्रेनर महावीर सिंह बताते है कि उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद की ओर से वर्ष 2005 में करीब सात लाख रुपये की लागत से इस बैंबू हट का निर्माण किया गया था। जिसका मकसद बैंबू हट का एक मॉडल प्रस्तुत कर होटल व्यावसायियों और आमजन में बांस के प्रति आकर्षण पैदा करने और सीमेंट-कंक्रीट के बजाय बांस की हट बनाने के लिए प्रेरित करना था। इस बैंबू हट की खास बात यह थी कि इस पर जहां भूकंप का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, वहीं बरसात में हट की ढलावदार छतों पर पानी न रुकने के कारण हट के भीतर पानी रिसने की समस्या भी नहीं होती है। हट का ढांचा इस तरह का था कि गर्मियों में इसके भीतर तापमान सामान्य के मुकाबले कम और सर्दी के मौसम में बाहरी तापमान के मुकाबले भीतर का तापमान अधिक रहता था। इस बैंबू हट में शुरुआती दौर में पर्यटन से जुड़ी कई गतिविधियां और कार्यक्रम किए गए, लेकिन समय बीतने के साथ ही उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद ने इस बैंबू हट की सुध लेनी जरूरी नहीं समझी। जिसके चलते बांस से निर्मित यह हट जर्जरहाल हो गई।
बैंबू हट की मरम्मत करवाई जाएगी। साथ ही उसमें मौजूद कमियों को भी दूर किया जाएगा। इसके लिए प्राकलन तैयार किया जाएगा।
- मनोज चंद्रन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उत्तराखंड बांस एवं रेशा परिषद देहरादून।
कोटद्वार के पनियाली स्थित बांस व रामबांस श्रेष्ठता एवं प्रचार-प्रसार केंद्र के मास्टर ट्रेनर महावीर सिंह बताते है कि उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद की ओर से वर्ष 2005 में करीब सात लाख रुपये की लागत से इस बैंबू हट का निर्माण किया गया था। जिसका मकसद बैंबू हट का एक मॉडल प्रस्तुत कर होटल व्यावसायियों और आमजन में बांस के प्रति आकर्षण पैदा करने और सीमेंट-कंक्रीट के बजाय बांस की हट बनाने के लिए प्रेरित करना था। इस बैंबू हट की खास बात यह थी कि इस पर जहां भूकंप का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, वहीं बरसात में हट की ढलावदार छतों पर पानी न रुकने के कारण हट के भीतर पानी रिसने की समस्या भी नहीं होती है। हट का ढांचा इस तरह का था कि गर्मियों में इसके भीतर तापमान सामान्य के मुकाबले कम और सर्दी के मौसम में बाहरी तापमान के मुकाबले भीतर का तापमान अधिक रहता था। इस बैंबू हट में शुरुआती दौर में पर्यटन से जुड़ी कई गतिविधियां और कार्यक्रम किए गए, लेकिन समय बीतने के साथ ही उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद ने इस बैंबू हट की सुध लेनी जरूरी नहीं समझी। जिसके चलते बांस से निर्मित यह हट जर्जरहाल हो गई।
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बैंबू हट की मरम्मत करवाई जाएगी। साथ ही उसमें मौजूद कमियों को भी दूर किया जाएगा। इसके लिए प्राकलन तैयार किया जाएगा।
- मनोज चंद्रन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उत्तराखंड बांस एवं रेशा परिषद देहरादून।