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उत्तराखंड डीजीपी के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे IPS खुराना
ब्यूरो / अमर उजाला, रुद्रपुर
Updated Sun, 27 Mar 2016 01:58 PM IST
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केवल खुराना
- फोटो : AmarUjala
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उत्तराखंड के आईपीएस अफसर केवल खुराना ने हरिद्वार के मंगलौर थाने में खुद पर दर्ज मुकदमे पर कड़ा ऐतराज जताया है।
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उनका आरोप है कि साजिशन वादी से तीन साल बाद नया प्रार्थना पत्र लिखवाकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। आईपीएस अफसर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए न तो शासन से कोई अनुमति ली गई और न ही जांच की जहमत उठाई गई। मुकदमे से नाम हटाने या जोड़ने से उनका कोई मतलब भी नहीं है। उन्होंने मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है।
बीते 23 मार्च को डीजीपी बीएस सिद्धू के आदेश पर मंगलौर थाने में आईपीएस अफसर केवल खुराना और इंस्पेक्टर राजीव डंडरियाल के खिलाफ मंगलौर थाने में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। खुराना पर पद का दुरुपयोग कर फैक्ट्री मालिक को बचाने का आरोप है।
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शनिवार को आईपीएस अफसर खुराना ने बेहद तल्ख अंदाज में पूरे मुकदमे को उनके खिलाफ साजिश बताते हुए हाईकोर्ट की शरण में जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि देहरादून एसएसपी रहते हुए और डीआईजी का चार्ज उनके पास था और जून 2013 में उन्होंने विवेचना हरिद्वार से टिहरी ट्रांसफर की थी।
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अगर उन्हें विवेचना प्रभावित करनी होती तो वह उसे देहरादून में ट्रांसफर करते। विवेचना ट्रांसफर करते समय उन्होंने डीआईजी अमित सिन्हा से भी पूछा था। वादी ने एक साल बाद विवेचना के संबंध में जो तहरीर दी, उसमें प्रमुख सचिव गृह ओमप्रकाश, उनका और विवेचक का नाम था।
डीआईजी संजय गुंज्याल ने बीते साल जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेजी और उनके, विवेचक खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की थी, लेकिन शासन से अनुमति नहीं मिली। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में दिए प्रार्थना पत्र के बाद जनवरी 2016 में नया प्रार्थना पत्र वादी ने डीजीपी को सौंपा।
जो पहले वाले प्रार्थना पत्र से बिल्कुल अलग था और उसमें तथ्य बदले गए थे। डीजीपी ने छुट्टी के दिन पीएचक्यू खुलवाकर मुकदमा दर्ज करने का आदेश एसएसपी हरिद्वार को दे दिया। न तो एफआईआर में पत्रांक का उल्लेख है और न ही थाने की मुहर लगी है।
उन्होंने कहा कि वादी के गदरपुर के पूर्व एसओ प्रदीप राणा से नजदीकियां हैं। राणा ने एसओ रहते हुए कनकटा गांव में ऑनर किलिंग की घटना को छिपाया था। अगर राणा और वादी की काल डिटेल निकाली जाए तो काफी कुछ साफ हो जाएगा। लेकिन वह इंसाफ के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ेंगे।
सूचना मांगी तो शुरु करा दी जांच
आईपीएस अफसर केवल खुराना ने कहा कि जंगलात की जमीन मामले में मनचाही जांच नहीं करने पर डीजीपी उनका उत्पीड़न कर रहे हैं। एक विवेचना बदलने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन राज्य सरकार के मुख्य सचिव ने जंगलात की जमीन को लेकर राज्य सभा में एफिडेबिट दे दिया, तब भी डीजीपी पर मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।
मुंबई की एक महिला ने भी डीजीपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रार्थना पत्र दिया था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने डीजीपी के विदेश दौरों को लेकर आरटीआई मांगी तो डीजीपी ने उनके खिलाफ ही जांच शुरु करवा दी। उन्होंने कहा कि पद का दुरुपयोग तो डीजीपी कर रहे हैं। लिहाजा उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए।