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चीन को 'चित' करने के लिए नेपाल से 'दोस्ती'
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 01 Oct 2013 09:49 AM IST
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नेपाल से सटे उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों के सामरिक महत्व के चलते भारतीय सेना अपने नेपाल से सैन्य रिश्ते मजबूत कर रही है। दोनों सेनाएं अपने संयुक्त सैन्य अभ्यास का दायरा बीते तीन वर्षों में प्लाटून से बटालियन स्तर तक कर चुकी हैं।
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चीन की सीमा भी इस क्षेत्र में होने के चलते भारतीय सेना नेपाल से रिश्तों को बेहतर बना रही है। फिलहाल सेना ने आपदा राहत बचाव कार्यों में परस्पर भागीदारी को लेकर अपने संयुक्त अभियानों का फोकस बनाया है।
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डेढ़ सौ किलोमीटर लंबी सीमा
उत्तराखंड के साथ नेपाल की लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर लंबी सीमा है, जबकि यह सीमा आगे चलकर चीन से लगती है। ऐसी स्थिति में सेना इस क्षेत्र को सामरिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानती है।
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चीन सीमा पर आए दिन घुसपैठ के मामले सेना की चिंता बढ़ा रहे हैं, जबकि इन दिनों नेपाल के भी चीन के साथ संबंध बेहतर हुए हैं। हालांकि भारत और नेपाल के सैन्य संबंध बेहद पुराने हैं, जिसमें नेपाली कैडेट्स के प्रशिक्षण तक की सुविधा भारतीय सैन्य अकादमियों में दी जाती है।
पिथौरागढ़ में संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण
गौरतलब है कि इस वर्ष जुलाई में नेपाल सेना प्रमुख जनरल गौरव शमशेर राणा नौ दिवसीय दौरे पर चीन गए थे। अब जनरल राणा के भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह के साथ पिथौरागढ़ में संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण के निरीक्षण के दौरान संयुक्त प्रशिक्षण अभियान का दायरा बढ़ाने पर भी वार्ता हुई।
संयुक्त ट्रेनिंग अभियानों का बढ़ता स्वरूप
भारतीय सेना और नेपाल सेना के बीच वर्ष 2011 से संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभियान चलाने का करार हुआ था। इसके तहत 2011 में दो बार प्लाटून स्तर ( 30 जवानों) ने जंगल युद्ध शैली को लेकर ट्रेनिंग की।
जंगल युद्ध पर संयुक्त प्रशिक्षण
वर्ष 2012 में इस ट्रेनिंग का स्वरूप बढ़ाते हुए कंपनी स्तर का किया गया, जिसमें हिमालयी क्षेत्रों में काउंटर इनसर्जेंसी और जंगल युद्ध पर संयुक्त प्रशिक्षण चला। इस वर्ष सूर्य किरण 5 के तहत दोनों और से आठ सौ जवानों ने प्राकृतिक आपदा के बाद पैदा होने वाली स्थिति से निपटने को लेकर युद्धाभ्यास किया। 2014 में युद्धाभ्यास का दायरा बढ़ाया जाने की तैयारी है।