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महाभारत सर्किट lसे जुड़ेगा भीमकुंड
रतनमणी डोभाल हरिद्वार
Updated Tue, 28 Feb 2017 11:07 PM IST
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महाभारतकालीन भीम के नाम से जुड़ा पौराणिक भीमकुंड (भीमगोडा) हरिद्वार को केंद्रीय वित्त पोषित योजना (स्वदेश दर्शन) के अंतर्गत महाभारत सर्किट से जोड़ा जाएगा। इसके लिए उत्तराखंड पर्यटन एवं संस्कृति सचिव शैलेश बगोली के निर्देश पर पर्यटन विकास विभाग के परामर्शदाता (कंसलटेंट) ने सोमवार शाम भीमगोडा कुंड का निरीक्षण किया। जिला पर्यटन विकास अधिकारी भी शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेज चुके हैैं।
महाभारतकाल का समय ईसा से 3000 वर्ष पहले माना जाता है। केंद्रीय पर्यटन विभाग ने महाभारतकालीन धरोहरों-स्थलों को विश्व पटल पर लाने के लिए एक सौ करोड़ रुपये की लागत से स्वदेश दर्शन नाम से महाभारत सर्किट बनाने की योजना बनाई है। उत्तराखंड के जिन स्थलों व जलाशयों को महाभारत सर्किट से जोड़ने की योजना बनाई जा रही थी उसमें भीमकुंड का नाम नहीं था। हरिद्वार के प्रकृति मित्र रविंद्र मिश्रा ने 16 जनवरी को उत्तराखंड पर्यटन एवं संस्कृति सचिव को पत्र भेजकर भीमकुंड का वृतांत बताते हुए उसको महाभारत सर्किट से जोड़ने का सुझाव दिया था। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के अवस्थापना निदेशक आरके जोशी ने 4 फरवरी को जिला पर्यटन विकास अधिकारी को पत्र भेजकर स्वदेश दर्शन योजना के तहत प्रस्तावित महाभारत सर्किट के अंतर्गत भीमगोडा को शामिल करने के संबंध में स्थलीय निरीक्षण कर तथ्यों की स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
भीमगोडा को महाभारत सर्किट में जोड़ने की रिपोर्ट भेजी
हमने स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत महाभारत सर्किट से भीमगोडा कुंड को जोड़ने के संबंध में स्थलीय निरीक्षण कर डेवलपमेंट, लाइटिंग, पानी के स्रोत आदि की विस्तृत रिपोर्ट परिषद को भेज दी है। हालांकि इसकी देखरेख का निर्धारण होना भी जरूरी है। इसकी जिम्मेदारी या तो नगर निगम को दी जाए या फिर एक ऐसी संस्था गठित हो जो देखरेख की जिम्मेदारी उठाए।
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जसपाल सिंह चौहान, जला पर्यटन एवं विकास अधिकारी
पर्यटन विकास परामर्शदाता ने किया निरीक्षण
पर्यटन सचिव के निर्देश पर सोमवार को उत्तराखंड पर्यटन विकास विभाग के परामर्शदाता (कंसलटेंट) वाशिंद्र ममगाईं ने भीमगोडा पहुंचकर प्रकृति मित्र रविंद्र मिश्रा के साथ महाभारतकालीन भीमकुंड, पांडव दरबार, ब्रिटिशकाल में भीमकुंड में निरंतर गंगाजल पहुंचाने के लिए बनी भूमिगत टनल तथा आसपास के मंदिरों को देखा और आवश्यक व प्रमाणिक तथ्यों की जानकारी ली। इस मौके पर सांसद प्रतिनिधि संजय त्रिवाल, नीरज ममगाईं व मुन्नालाल वैष्णवी ने भी उपस्थित थे।
महाभारतकाल का समय ईसा से 3000 वर्ष पहले माना जाता है। केंद्रीय पर्यटन विभाग ने महाभारतकालीन धरोहरों-स्थलों को विश्व पटल पर लाने के लिए एक सौ करोड़ रुपये की लागत से स्वदेश दर्शन नाम से महाभारत सर्किट बनाने की योजना बनाई है। उत्तराखंड के जिन स्थलों व जलाशयों को महाभारत सर्किट से जोड़ने की योजना बनाई जा रही थी उसमें भीमकुंड का नाम नहीं था। हरिद्वार के प्रकृति मित्र रविंद्र मिश्रा ने 16 जनवरी को उत्तराखंड पर्यटन एवं संस्कृति सचिव को पत्र भेजकर भीमकुंड का वृतांत बताते हुए उसको महाभारत सर्किट से जोड़ने का सुझाव दिया था। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के अवस्थापना निदेशक आरके जोशी ने 4 फरवरी को जिला पर्यटन विकास अधिकारी को पत्र भेजकर स्वदेश दर्शन योजना के तहत प्रस्तावित महाभारत सर्किट के अंतर्गत भीमगोडा को शामिल करने के संबंध में स्थलीय निरीक्षण कर तथ्यों की स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
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भीमगोडा को महाभारत सर्किट में जोड़ने की रिपोर्ट भेजी
हमने स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत महाभारत सर्किट से भीमगोडा कुंड को जोड़ने के संबंध में स्थलीय निरीक्षण कर डेवलपमेंट, लाइटिंग, पानी के स्रोत आदि की विस्तृत रिपोर्ट परिषद को भेज दी है। हालांकि इसकी देखरेख का निर्धारण होना भी जरूरी है। इसकी जिम्मेदारी या तो नगर निगम को दी जाए या फिर एक ऐसी संस्था गठित हो जो देखरेख की जिम्मेदारी उठाए।
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जसपाल सिंह चौहान, जला पर्यटन एवं विकास अधिकारी
पर्यटन विकास परामर्शदाता ने किया निरीक्षण
पर्यटन सचिव के निर्देश पर सोमवार को उत्तराखंड पर्यटन विकास विभाग के परामर्शदाता (कंसलटेंट) वाशिंद्र ममगाईं ने भीमगोडा पहुंचकर प्रकृति मित्र रविंद्र मिश्रा के साथ महाभारतकालीन भीमकुंड, पांडव दरबार, ब्रिटिशकाल में भीमकुंड में निरंतर गंगाजल पहुंचाने के लिए बनी भूमिगत टनल तथा आसपास के मंदिरों को देखा और आवश्यक व प्रमाणिक तथ्यों की जानकारी ली। इस मौके पर सांसद प्रतिनिधि संजय त्रिवाल, नीरज ममगाईं व मुन्नालाल वैष्णवी ने भी उपस्थित थे।