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डीलरों व विभाग की फिर गले की फांस बनेगा साबुत चना
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साबुत चना फिर से डीलरों और विभाग के लिए गले की फांस बनने जा रहा है। दरअसल, पिछले साल आए साबुत चने की उपभोक्ताओं की ओर से खरीद न किए जाने पर डीलरों ने काफी विरोध किया था। बावजूद इसके साबुत चने का दोबारा आवंटन कर दिया गया है। जिससे नाराज डीलरों का कहना है कि वह चने का उठान नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें काफी नुकसान झेलना पड़ता है।
सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर राशन के साथ ही दालों का भी वितरण सस्ती दरों पर किया जाता है। कई बार दालों के दाम बाजारों के बराबर और अच्छी गुणवत्ता के नहीं होने से उपभोक्ता खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। पिछले साल आवंटित साबुत चने के गुणवत्ता और दाम को लेकर डीलरों ने धरना-प्रदर्शन किया था। डीलरों का कहना था कि उपभोक्ता चना खरीदने को तैयार नहीं हैं। बाद में बड़ी मुश्किल से डीलरों ने चने का उठान किया था। इन सबके बावजूद शासन की ओर से दोबारा साबुत चने का आवंटन कर दिया गया है। चने का दाम 62 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। साबुत चना आने की जानकारी मिलने पर डीलरों ने नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी है।
राजकीय उचित दर विक्रेता एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा, महामंत्री प्रदीप अग्रवाल, कोषाध्यक्ष सुभाष व तीरथ लोधी ने बताया कि पिछली बार आए साबुत चने को उपभोक्ताओं ने खरीदना मुनासिब नहीं समझा। जिसके कारण उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा। ऐसे में चना फिर से भेज देना डीलरों का उत्पीड़न करने का काम किया गया है। डीलर चना नहीं उठाएंगे। उधर, जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल का कहना है कि साबुत चने का उठान आजकल में डीलरों से शुरू करा दिया जाएगा, जो नहीं उठाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर राशन के साथ ही दालों का भी वितरण सस्ती दरों पर किया जाता है। कई बार दालों के दाम बाजारों के बराबर और अच्छी गुणवत्ता के नहीं होने से उपभोक्ता खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। पिछले साल आवंटित साबुत चने के गुणवत्ता और दाम को लेकर डीलरों ने धरना-प्रदर्शन किया था। डीलरों का कहना था कि उपभोक्ता चना खरीदने को तैयार नहीं हैं। बाद में बड़ी मुश्किल से डीलरों ने चने का उठान किया था। इन सबके बावजूद शासन की ओर से दोबारा साबुत चने का आवंटन कर दिया गया है। चने का दाम 62 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। साबुत चना आने की जानकारी मिलने पर डीलरों ने नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी है।
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राजकीय उचित दर विक्रेता एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा, महामंत्री प्रदीप अग्रवाल, कोषाध्यक्ष सुभाष व तीरथ लोधी ने बताया कि पिछली बार आए साबुत चने को उपभोक्ताओं ने खरीदना मुनासिब नहीं समझा। जिसके कारण उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा। ऐसे में चना फिर से भेज देना डीलरों का उत्पीड़न करने का काम किया गया है। डीलर चना नहीं उठाएंगे। उधर, जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल का कहना है कि साबुत चने का उठान आजकल में डीलरों से शुरू करा दिया जाएगा, जो नहीं उठाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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