{"_id":"62150c7e01281830a35bcdbc","slug":"waiting-for-the-fire-unit-for-years-haridwar-news-drn404732350","type":"story","status":"publish","title_hn":"सालों से अग्निशमन इकाई की बाट जोह रहा घाड़ क्षेत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सालों से अग्निशमन इकाई की बाट जोह रहा घाड़ क्षेत्र
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संपूर्ण घाड़ क्षेत्र फायर स्टेशन की बाट जोह रहा है। गर्मियां आने वाली हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों को अभी से आग लगने की घटनाओं की चिंता समाने लगी है। क्षेत्रीय ग्रामीण पिछले कई सालों से अग्निशमन विभाग की इकाई स्थापित करने की मांग करते आ रहे हैं। सुनवाई नहीं हो रही है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश भी बना है।
घाड़ क्षेत्र में गर्मियों में आग लगने की घटनाएं अधिक होती हैं। संपूर्ण घाड़ क्षेत्र हरिद्वार या रुड़की अग्निशमन विभाग की गाड़ियों पर निर्भर रहता है। आग लगने की घटना पर इन जगहों से दमकल के वाहन पहुंचने तक आग में सबकुछ जलकर राख हो जाता है। क्षेत्र में बड़ा हादसा होने पर अग्निशमन इकाई स्थापना की मांग जोर पकड़ती है, लेकिन समय के साथ फिर ठंडी हो जाती है। सालों से यह सिलसिला चलता आ रहा है। घाड़ क्षेत्र में धनौरी, धनौरा, गढ़, मीरपुर, कुतुबपुर, राजपुर, पूरनपुर, कोटामुराद नगर, आसफनगर, हजारा ग्रन्ट, खाला टिहरा, टांडा टिहरा,कोटा खेडा, औरंगाबाद, आनेकी, डालुवाला कला, बड़ी लाम, छोटी लाम, डालुवाला खुर्द, रिठौरा ग्रंट, बंदर जुड़, बुग्गावाला, लालवाला, रसूलपुर टोंगिया, हजारा ग्रंट, टांडाटिहरा, औरंगाबाद, तेलीवाला, बंदरजुड, डालूवाला मजबता आदि गांव शामिल हैं। संवाद
सालों से क्षेत्र में अग्निशमन इकाई की मांग हो रही है। तीन दर्जन से अधिक गांवों को इसका फायदा मिल सकता है। शासन-प्रशासन हर बार मांग को ठंडे बस्ते मे डाल देता है। - अंकित कुमार, अध्यक्ष भारतीय उत्थान परिषद
विज्ञापन
अगर घाड़ क्षेत्र में अग्निशमन विभाग की इकाई खुलने पर एक गाड़ी उपलब्ध रहे तो अग्निकांड की घटनाओं पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। इससे समय पर आग बुझाने से नुकसान को बचाया जा सकता है। - सुभाष सैनी, अध्यक्ष घाड़ क्षेत्र संघर्ष समिति
विज्ञापन
घाड़ क्षेत्र में गर्मियों में आग लगने की घटनाएं अधिक होती हैं। संपूर्ण घाड़ क्षेत्र हरिद्वार या रुड़की अग्निशमन विभाग की गाड़ियों पर निर्भर रहता है। आग लगने की घटना पर इन जगहों से दमकल के वाहन पहुंचने तक आग में सबकुछ जलकर राख हो जाता है। क्षेत्र में बड़ा हादसा होने पर अग्निशमन इकाई स्थापना की मांग जोर पकड़ती है, लेकिन समय के साथ फिर ठंडी हो जाती है। सालों से यह सिलसिला चलता आ रहा है। घाड़ क्षेत्र में धनौरी, धनौरा, गढ़, मीरपुर, कुतुबपुर, राजपुर, पूरनपुर, कोटामुराद नगर, आसफनगर, हजारा ग्रन्ट, खाला टिहरा, टांडा टिहरा,कोटा खेडा, औरंगाबाद, आनेकी, डालुवाला कला, बड़ी लाम, छोटी लाम, डालुवाला खुर्द, रिठौरा ग्रंट, बंदर जुड़, बुग्गावाला, लालवाला, रसूलपुर टोंगिया, हजारा ग्रंट, टांडाटिहरा, औरंगाबाद, तेलीवाला, बंदरजुड, डालूवाला मजबता आदि गांव शामिल हैं। संवाद
विज्ञापन
सालों से क्षेत्र में अग्निशमन इकाई की मांग हो रही है। तीन दर्जन से अधिक गांवों को इसका फायदा मिल सकता है। शासन-प्रशासन हर बार मांग को ठंडे बस्ते मे डाल देता है। - अंकित कुमार, अध्यक्ष भारतीय उत्थान परिषद
विज्ञापन
अगर घाड़ क्षेत्र में अग्निशमन विभाग की इकाई खुलने पर एक गाड़ी उपलब्ध रहे तो अग्निकांड की घटनाओं पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। इससे समय पर आग बुझाने से नुकसान को बचाया जा सकता है। - सुभाष सैनी, अध्यक्ष घाड़ क्षेत्र संघर्ष समिति