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भगवानपुर में एक खानदान के बीच त्रिकोणीय मुकाबला
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भगवानपुर में इस बार देवर-भाभी ही नहीं बल्कि एक ही खानदान के बीच सीधा त्रिकोणीय मुकाबला होने जा रहा है। दरअसल, तीनों प्रमुख दलों की ओर से देवर-भाभी के साथ ही खानदान के तीसरे व्यक्ति को भी चुनाव मैदान में उतारा गया है। क्षेत्र के ये तीनों दिग्गज पार्टी से हरी-झंडी मिलने के बाद एक दूसरे को पटखनी देने के लिए जुट भी गए हैं।
जनपद की 11 सीटों में एक भगवानपुर सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है। इस सीट पर वर्ष 2007 में बसपा से सुरेंद्र राकेश विधायक चुने गए थे। वर्ष 2012 में भी वह बसपा से चुनाव जीतकर कांग्रेस की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने थे। हालांकि, वर्ष 2015 में उनका निधन होने के बाद उनकी पत्नी ममता राकेश कांग्रेस से उपचुनाव लड़कर भारी अंतर से चुनाव जीती थी। 2017 के चुनाव में राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते सुबोध राकेश भाजपा और ममता राकेश कांग्रेस से आमने-सामने आ गए थे। तब भाभी ने देवर को पटखनी देकर दूसरी बार विधायक बनने में सफलता हासिल की थी। उस चुनाव में देवर-भाभी के बीच यह रोचक मुकाबला काफी चर्चा में रहा था। इस बार के चुनाव में फिर से देवर-भाभी आमने-सामने हैं। ममता राकेश कांग्रेस से ही चुनाव ताल ठोक रही हैं तो सुबोध राकेश दल- बदलकर भाजपा छोड़ बसपा से किस्मत आजमां रहे हैं। इस चुनाव में खास बात यह है कि भाजपा ने भी तीसरे प्रत्याशी के रूप में ममता-सुबोध राकेश के खानदान के ही मास्टर सत्यपाल को टिकट दिया है। ऐसे में भगवानपुर विधानसभा चुनाव में तीनों प्रमुख दलों से एक खानदान से ही ताल्लुक रखने वाले तीनों प्रत्याशी विधानसभा भवन की कुर्सी पर बैठने के लिए एक दूसरे को परास्त करने के लिए चुनावी दंगल में उतर चुके हैं। माना जा रहा है कि तीनों में ही कड़ा चुुनावी संघर्ष होगा क्योंकि मास्टर सत्यपाल 2012 में कांग्रेस के टिकट पर सुरेंद्र राकेश को भी चुनौती दे चुके हैं। संवाद
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जनपद की 11 सीटों में एक भगवानपुर सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है। इस सीट पर वर्ष 2007 में बसपा से सुरेंद्र राकेश विधायक चुने गए थे। वर्ष 2012 में भी वह बसपा से चुनाव जीतकर कांग्रेस की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने थे। हालांकि, वर्ष 2015 में उनका निधन होने के बाद उनकी पत्नी ममता राकेश कांग्रेस से उपचुनाव लड़कर भारी अंतर से चुनाव जीती थी। 2017 के चुनाव में राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते सुबोध राकेश भाजपा और ममता राकेश कांग्रेस से आमने-सामने आ गए थे। तब भाभी ने देवर को पटखनी देकर दूसरी बार विधायक बनने में सफलता हासिल की थी। उस चुनाव में देवर-भाभी के बीच यह रोचक मुकाबला काफी चर्चा में रहा था। इस बार के चुनाव में फिर से देवर-भाभी आमने-सामने हैं। ममता राकेश कांग्रेस से ही चुनाव ताल ठोक रही हैं तो सुबोध राकेश दल- बदलकर भाजपा छोड़ बसपा से किस्मत आजमां रहे हैं। इस चुनाव में खास बात यह है कि भाजपा ने भी तीसरे प्रत्याशी के रूप में ममता-सुबोध राकेश के खानदान के ही मास्टर सत्यपाल को टिकट दिया है। ऐसे में भगवानपुर विधानसभा चुनाव में तीनों प्रमुख दलों से एक खानदान से ही ताल्लुक रखने वाले तीनों प्रत्याशी विधानसभा भवन की कुर्सी पर बैठने के लिए एक दूसरे को परास्त करने के लिए चुनावी दंगल में उतर चुके हैं। माना जा रहा है कि तीनों में ही कड़ा चुुनावी संघर्ष होगा क्योंकि मास्टर सत्यपाल 2012 में कांग्रेस के टिकट पर सुरेंद्र राकेश को भी चुनौती दे चुके हैं। संवाद
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