उत्तराखंड: दस साल में कितना बदल गया किशोरों का मिजाज? रातोंरात वायरल होने की चाह और बढ़ती मोबाइल गेमिंग की लत
सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया ने किशोरों की सोच, व्यवहार और प्राथमिकताओं पर गहरा असर डाला है। बाल कल्याण समिति के सदस्य दिनेश कुमार शर्मा ने किशोरों में उभर रही सात नई प्रवृत्तियों को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों को सजग रहने की जरूरत बताई है।
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आज का किशोर 10 साल पहले जैसा नहीं है, वह तेजी से बदल रहा है। बाल कल्याण समिति के सदस्य दिनेश कुमार शर्मा ने किशोरों में सात नई प्रवृत्तियों का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि माता-पिता और शिक्षकों को इन बदलावों को समझना होगा।
अमर उजाला से बातचीत में दिनेश शर्मा ने कहा कि किशोरों में पहचान का संकट गहरा रहा है। वे वास्तविक और आभासी दुनिया के बीच खुद को खोज रहे हैं। उनमें त्वरित सफलता की भूख है, वे रातों-रात वायरल होना चाहते हैं। पढ़ाई को धीमी प्रक्रिया मानकर वे तुरंत अवसाद में चले जाते हैं। भावनात्मक अकेलापन भी एक खतरनाक प्रवृत्ति है, जहां हजारों फॉलोअर्स होने पर भी उन्हें सहारा नहीं मिलता।
बाल कल्याण समिति के सदस्य दिनेश शर्मा का कहना है कि किशोर अब विद्रोह के बजाय तर्क से बात करते हैं। उन्हें तर्क से समझाने पर वे आज्ञाकारी बनते हैं, डांटने पर दूर हो जाते हैं। वे लिंग और रिश्तों को लेकर सहज हैं। सहमति और निजता को समझते हैं। सही मार्गदर्शन न मिलने पर यह भावनात्मक आघात भी दे सकता है। नशे और पलायनवाद की ओर भी उनका झुकाव बढ़ा है, खासकर मोबाइल गेमिंग की लत।
उभरती सामाजिक चेतना और चुनौतियां
किशोरों में पर्यावरण, जानवरों और गरीबों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ी है। उनमें सामाजिक न्याय की भावना भी अधिक तेज है, लेकिन अकेलेपन के कारण वे वेप, ई-सिगरेट और गांजा जैसे नशे की ओर मुड़ रहे हैं। मोबाइल गेमिंग की लत उन्हें वास्तविक जीवन की जीत से दूर कर रही है। यह प्रवृत्ति उन्हें भागने का रास्ता दिखाती है।
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किशोरों को समझने के लिए चार सलाह
दिनेश कुमार शर्मा ने किशोरों को समझने के लिए चार महत्वपूर्ण सलाह दी हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता 20 मिनट बिना मोबाइल के उनकी बात सुनें, लेक्चर न दें। उन्हें खुद रोल मॉडल बनना चाहिए, न कि केवल नियम पुस्तिका थमानी चाहिए। किशोरों को यह सिखाना जरूरी है कि असफल होना पाप नहीं है, मेहनत ही असली नायक है। उन्हें अपनी भावनाएं व्यक्त करना सिखाएं, क्योंकि रोना कमजोरी नहीं है।