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धामी कैबिनेट: पर्वतीय क्षेत्रों को राहत: पहाड़ में निजी विश्वविद्यालय खोलना होगा आसान, भूमि मानकों में छूट

Mon, 05 Oct 2026 08:01 AM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Mon, 05 Oct 2026 08:01 AM IST
सार

पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए उच्च शिक्षा के संस्थानों की स्थापना के नियमों में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था से पहाड़ों में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की राह पहले के मुकाबले अधिक व्यावहारिक होने की उम्मीद है।

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Uttarakhand Cabinet eases land norms for private universities built up area required in hills
धामी कैबिनेट के फैसले - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तराखंड में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को आसान बनाने के लिए सरकार ने भूमि संबंधी मानकों में बदलाव को मंजूरी दी है। धामी कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए निर्धारित नीति एवं मानकों में संशोधन को स्वीकृति दी है। इसका लाभ विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में विश्वविद्यालय स्थापित करने के इच्छुक संस्थानों को मिलेगा।

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संशोधित व्यवस्था के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में निजी विश्वविद्यालय के लिए न्यूनतम 2,500 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र जरूरी होगा, जबकि मैदानी क्षेत्रों में यह सीमा 20,000 वर्गमीटर निर्धारित की गई है। सरकार का मानना है कि भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए निर्मित क्षेत्र का प्रावधान विश्वविद्यालयों की स्थापना को अधिक व्यावहारिक बनाएगा।

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वर्तमान व्यवस्था में पर्वतीय क्षेत्रों में विश्वविद्यालय के लिए 2.5 एकड़ भूमि पांच किलोमीटर की परिधि में अधिकतम तीन स्थानों पर और मैदानी क्षेत्रों में 10 एकड़ भूमि का मानक है। कैबिनेट ने भूमि के स्थान पर निर्मित क्षेत्र को आधार बनाने का निर्णय लिया है।

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वित्तीय मानकों में भी बदलाव किया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में तीन करोड़ और मैदानी क्षेत्रों में पांच करोड़ रुपये की स्थायी विन्यास निधि तथा बैंक खाते में मैदानी क्षेत्रों के लिए न्यूनतम 20 करोड़ और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए दो करोड़ रुपये की व्यवस्था समाप्त कर प्रोसेसिंग शुल्क की धनराशि कम की गई है। इसके साथ ही निजी विश्वविद्यालयों के प्रस्तावों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मूल्यांकन के मानक तय किए जाएंगे। संस्थानों के प्रस्तावों का निर्धारित गुणवत्ता मानकों के आधार पर मूल्यांकन होगा।

 

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