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वो चींखती रही वो डुबोता रहा
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 08 Feb 2016 11:34 PM IST
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हरिद्वार। मध्यप्रदेश के जिला भिंड से अर्द्धकुंभ स्नान के लिए एक समूह के साथ आई लड़की को एक भगत (ओझा) गर्दन पकड़कर बार बार गंगाजी में डुबोता रहा। डर के मारे वो चींखती चिल्लाती रही लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ। बार बार डुबोने से लड़की के पेट में ज्यादा पानी भरा तो वह तड़पने लगी। तब ओझा ने यह कहकर छोड़ा कि अब उसका देवता उतर गया है।
अर्द्धकुंभ में जहां देश के कोने कोने से लोग हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड पर स्नान करने के लिए आए हैं। वहीं कई लोग दूसरे मकसद मसलन तारण, मारण और उच्चाटन आदि भी पूरे कर रहे हैं। सोमवार को सोमवती अमावस्या पर अर्द्धकुँभ के दूसरे स्नान में करीब 60 महिला पुरुषों का एक दल मध्यप्रदेश के जिला भिंड से आया था। इनके साथ दाढ़ी और बड़े केश वाला एक भगत बाबा था। जो अपने दो तीन चेलों के साथ बड़े डमरू जैसी ढोलक हाथ में लिए थे। साथ आए बाकी बुजुर्ग, महिला, युवा, लड़कियां और छोटे बच्चे हरकी पैड़ी मालवीय घाट की पैड़ियों पर गंगाजल में आधे डूबे हुए अपने दोनों हाथ जोड़कर उसे घेरे बैठे थे। चेले ढोलक बजा रहे थे और बाबा एक युुुवती को गर्दन से पकड़कर बार बार गंगाजी में डूबकी लगवा रहा था। बाबा से छूटने के लिए युवती चींखती चिल्लाती रही। जब पेट में ज्यादा पानी भरने लगा तो वह अपनी सुधबुध खोने लगी । इस पर बाबा को लगा कि अब और डूबाने से वह मर सकती है तो जोर से चिल्लाया उतर गया देवता उतर गया देवता। युवती के परिजनों से बाबा ने अपने चेलों को 551 रुपये दक्षिणा दिलवाई और नारियल सहित कुछ सामान जल प्रवाह कराया। इसी तरह अन्य महिलाओं के साथ भी किया गया। बारी बारी से सब बाबा के हाथों डूबकी लेकर दक्षिणा देते रहे और उनके देवता उतरते गए। उनके साथ एक अधेड़ ऐसा भी था जो कपड़े उतारकर गंगाजी में नहीं खड़ा था। पैड़ी से ऊपर फर्श पर खड़े हुए उसने अपना नाम बताने से मना करते हुए केवल इतना कहा कि पता नहीं ये अंधविश्वास कब खत्म होगा। यहां भी धंधा करने चला आया बाबा।
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