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निजी गार्डन में फूलों की बहार, सरकारी में बचा सिर्फ झाड़

Mon, 13 Dec 2021 08:24 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 13 Dec 2021 08:24 PM IST
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There is an outcry of negligence of the officers in Phulwari
तुलसी चौक स्थित गंग नहर पटरी पर रखरखाव के अभाव में उजाड़ हुई फुलवारी । - फोटो : HARIDWAR
सर्दियों के मौसम में लोगों के आंगन और गार्डन में सीजनल फूलों की बहार है। रंग बिरंगे फूल आंखों को तृप्त कर रहे और मन हिलोरे मार रहा है। ठीक इसके विपरीत कुंभ के दौरान लाखों रुपये खर्च करके मेला क्षेत्र में जगह जगह तैयार फुलवारी में लगाए गए पौधे सूखकर झाड़ी हो गए हैं। वर्टिकल गार्डन में लगाए फूलों के पौधों का नामोनिशान मिट गया और अब केवल गमले ही दिखाई दे रहे हैं।
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नवंबर से फरवरी तक सीजनल फूलों की बहार रहती है। लोगों के घरों के आंगन और छतों पर अलग-अलग प्रजातियों के फूल खिल रहे हैं। गार्डन और पार्कों में भी फूलों की बहार खिलने लगी है। लेकिन हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की ओर से कुंभ के दौरान तैयार की गई फुलवारी उजाड़ हो गई है। कुंभ शुरू होने से पहले गंगनहर पटरी के किनारे स्थायी फुलवारी बनाई गई। इनमें कई सदाबहार फूल तो कई सीजनल लगाए गए थे।
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एचआरडीए ने कुंभ मेला अधिकारी के आवास से नहर पटरी तक काफी बड़े क्षेत्र में कई प्रजातियां के फूलों के पौधे लगाए थे। तब फुलवारी को देखकर शहर के लोगों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी गदगद नजर आते थे। अमरापुर घाट पर शाम को फुलवारी को निहारने के लिए लोगों की भीड़ जुटती थी।
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कुंभ खत्म होने के बाद तैयार की गई फुलवारी की एचआरडीए के अधिकारियों ने सुध नहीं ली। अब हालात यह हो गए हैं कि फुलवारी में सिर्फ झाड़ियां बची हैं। मेला भवन और रोड़ीबेलवाला में लगाए फूलों के निशा भी नहीं बचे हैं।
वर्टिकल गार्डन से भी गायब हुई फूलों की महक
अलकनंदा घाट स्थित केशव आश्रम की दीवार पर कुंभ में वर्टिकल गार्डन तैयार किया गया था। गार्डन में आठ हजार प्रजाति के फूलदार और शोभादार पौधे लगाए गए थे। सिडकुल की एकम्स कंपनी ने सीएसआर फंड से इसको विकसित किया था। वर्टिकल गार्डन बीस फीट ऊंची दीवार पर 400 फीट चौड़ा है। वर्टिकल गार्डन तो अभी तक है, लेकिन उसमें फूलों की बाहर गायब हो गई है।

- कुंभ अवधि में गंगनहर और मेला क्षेत्र में भी कई जगहों पर अस्थायी तौर पर फूल लगाए गए थे। गंगनहर किनारे की फुलवारी की स्थिति खराब हो गई है। प्राधिकरण की ओर से फुलवारी को दोबारा से आबाद किया जाएगा।
- एआर जोशी, उद्यान अधिकारी एचआरडीए
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