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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   The two and a half crore municipal Lapse

नगर निगम का ढाई करोड़ रुपये लैप्स

Sun, 29 Nov 2015 11:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Sun, 29 Nov 2015 11:36 PM IST
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हरिद्वार। नगर निगम का 2 करोड़ 50 लाख 55 हजार रुपये लैप्स हो गया है। विकास के लिए धन नहीं होने का रोना रो रही भाजपा की इस स्थानीय सरकार के मुखिया के पास अब बगले झांकने के अलावा कोई ठोस कारण और जवाब नहीं है।
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14वें वित्त आयोग ने वार्षिक अनुदान की प्रथम किश्त जुलाई में जारी की थी। शासनादेश में स्पष्ट है कि इस राशि को 30 नवंबर तक खर्च कर उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाना है। इसके बाद अनुदान की द्वितीय किश्त जारी की जाएगी। इस हिदायत के बाद भी ढाई करोड़ रुपये पर निगम प्रशासन कुंडली जमाकर बैठा रहा। बोर्ड से सड़क निर्माण, सफाई उपकरण खरीदने, पथ-प्रकाश की व्यवस्था बेहतर करने के लिए विद्युत सामग्री खरीदने का प्रस्ताव पास करवा रखा है।
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इनसेट
(यह वर्जन दोबारा आएगा)
बोर्ड ने निर्माण कार्य संबंधी कई प्रस्ताव पारित किए हैं। लेकिन नगर प्रमुख ने उन्हें छोड़ नए प्रस्ताव दिए हैं। जबकि बोर्ड में पारित विकास संबंधी प्रस्तावों का क्रियान्वयन नहीं होने का सवाल उठ चुका है। हम विधानसभा में लिखकर दे चुके हैं कि धन की उपलब्धता होने पर कार्य होंगे। ऐसे में यदि पुराने प्रस्तावों के स्थान पर नए कार्य कराने हैं तो बोर्ड से प्रस्ताव पारित कराना होगा। पुराने प्रस्ताव छोड़ने पर कोई भी सभासद आपत्ति कर सकता है। इसलिए बोर्ड का निर्णय बोर्ड ही बदल सकता है। अनुदान राशि खर्च करने के लिए समय बढ़ाने के लिए पत्र भेजा जा रहा है।
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विप्रा त्रिवेदी, मुख्य नगर अधिकारी।
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एमएनए पर बरसे मेयर
हरिद्वार। नगर प्रमुख मनोज गर्ग ने कहा कि 14वें वित्त आयोग से प्राप्त ढाई करोड़ की अनुदान राशि का लैप्स करने के लिए मुख्य नगर अधिकारी जिम्मेदार हैं। वह उनकी कारगुजारी को लेकर राज्यपाल से मिलेंगे। उनके अधिकार सीज करने सहित सड़क पर मोर्चा खोलना पड़ा तो वह इससे भी पीछे नहीं हटेंगे। वह जानबूझकर बोर्ड के निर्णयों को पेडिंग में डालती रही हैं। उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ नए ठेकेदारों का रजिस्ट्रेशन कराकर उन्हें काम देने के चक्कर में यह सब किया जा रहा है। 4-4 लाख रुपये के काम सभी वार्डों में किए जाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन यह अधिकारी काम लटकाती रही हैं। यदि विधानसभा में कुछ लिखकर दिया गया था तो वह बात बोर्ड से क्यों छुपाई।
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