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बार्डर पर औपचारिकता, बसों में नहीं बाध्यता

Fri, 09 Jul 2021 11:06 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 09 Jul 2021 11:06 PM IST
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The risk of infection from the double standard of negative reports
कोविड मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में धर्मनगरी आने वाले यात्रियों के लिए आरटीपीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता अब भी बरकरार है। अंतरराज्यीय बसों का संचालन शुरू होने और बाहरी राज्यों से यात्रियों के आने से नेगेटिव जांच रिपोर्ट खानापूर्ति में सिमट गई है। निजी वाहनों से आने वालों की बार्डर पर चेकिंग की औपचारिकता हो रही है। जबकि रोडवेज की बसों से आने वाले यात्रियों के लिए रिपोर्ट की बाध्यता नहीं है। ऐसे में वीकेंड पर भीड़ उमड़ रही है और कोविड संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है।
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दिल्ली, यूपी और हरियाणा और पंजाब के अनलॉक होने के साथ उत्तराखंड भी कोविड कर्फ्यू में बाजारों के खुलने की छूट है। कोविड कर्फ्यू की एसओपी में हरिद्वार आने वाले यात्रियों के लिए आरटीपीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता को बरकरार रखा है। बाहरी राज्यों के यात्रियों की भीड़ उमड़ने के साथ एसओपी का पालन नहीं हो रहा है। हरिद्वार में प्रतिदिन हजारों की संख्या में बाहरी लोग आ रहे हैं। वीकेंड पर हरकी पैड़ी सील करनी पड़ी थी। पार्किंगों में वाहन खड़े करने की जगह नहीं मिल रही है। अधिकतर लोग बिना रोकटोक और नेगेटिव रिपोर्ट के हरिद्वार पहुंच रहे हैं।
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अंतरराज्यीय बसों का संचालन शुरू होने से यात्रियों की भीड़ बढ़ी है। बाहरी राज्यों एवं उत्तराखंड रोडवेज की बसों को बार्डर पर यात्रियों की नेगेटिव रिपोर्ट चेक करने के लिए नहीं रोका जा रहा है। बाहरी राज्यों से बसें सवारियां लेकर आ रही हैं। अड्डे पर भीड़ जुट रही है। हालांकि, निजी वाहनों से आने वालों की बार्डर पर औपचारिकता निभाई जा रही हैं। रैंडम निजी वाहनों को रोकने पर नेगेटिव रिपोर्ट नहीं होने के बाद भी यात्रियों को नहीं लौटाया जा रहा है।
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रिपोर्ट की अनिवार्यता बनी फांस
एसओपी में हरिद्वार में होटल और धर्मशालाओं में ठहरने वाले यात्रियों के लिए आरटीपीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता है। यात्री बिना रिपोर्ट हरिद्वार तो पहुंच रहे हैं, लेकिन ठहरने के लिए भटक रहे हैं। इससे होटल व धर्मशाला संचालकों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। राष्ट्रीय धर्मशाला सुरक्षा समिति के महामंत्री विकास तिवारी का कहना है कि हरिद्वार में धर्मशालाओं और होटलों का काम यात्रियों पर निर्भर है। एसओपी होटल व धर्मशाला संचालकों के गले की फांस बनी है। यात्री भी परेशान होकर हरिद्वार से रात्रि में लौटने को मजबूर हैं।
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