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Haridwar News: ठेकेदार पर फूटा घाटों की नींव में भ्रष्टाचार का ठीकरा
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अर्धकुंभ मेले को लेकर बने रहे गंगा घाट पर फिर से मरमत करते श्रमिक । संवाद
कुंभ मेला 2027 की तैयारियों के तहत बन रहे नए घाटों की नींव में गंभीर भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री का ठीकरा फिलहाल ठेकेदार पर ठीकरा फोड़ दिया गया है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ओमजी गुप्ता ने निर्माण करा रही फर्म को नोटिस जारी किया है। नोटिस में ठेकेदार को क्षतिग्रस्त फाउंडेशन को फिर से दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है। निर्माण में प्रयुक्त सामग्री के मानकों की जांच कराने को कहा गया है।
घाटों के निर्माण के दौरपन नींव उखड़ने और सरिये बाहर निकलने की घटना सामने आने के बाद पहले दिन शनिवार को मेलाधिकारी ने और दूसरे दिन रविवार को कई टीमों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। मामले का खुलासा होते ही ठेकेदार ने आनन-फानन में घटिया सामग्री के इस्तेमाल को छिपाने का प्रयास शुरू कर दिया। ठेकेदार ने श्रमिकों को गैंती और फावड़े के साथ मौके पर उतारा जिन्होंने तेजी से सबूत और साक्ष्य मिटाना शुरू कर दिया। श्रमिकों ने धारा के वेग से बहे मलबे के बीच गिरे सरियों को उठाकर सीधा किया। बिना सीमेंट बिखरे पड़े कंक्रीट को खोदकर गंगा में फेंका जाने लगा।
इस पूरी प्रक्रिया में अधिकारियों की शुरुआती उदासीनता भी सामने आई है। उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता फिलहाल अवकाश पर हैं जबकि निरीक्षण के लिए मेला प्रशासन के साथ अधीक्षण अभियंता सुरेश तोमर पहुंचे। इस गंभीर लापरवाही पर फिलहाल उच्च स्तर से किसी अधिकारी से कोई स्पष्टीकरण नहीं लिया गया है।
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अधिशासी अभियंता ओमजी गुप्ता ने कहा कि घाट के लिए फाउंडेशन का निर्माण अल्प अवधि में किया गया लेकिन निर्माण कार्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी ठेकेदार की थी। उन्होंने दोहराया कि मानकों के अनुरूप काम नहीं मिलने पर फर्म को एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया जाएगा। ओमजी गुप्ता ने दावा किया है कि मंगलवार तक क्षतिग्रस्त हिस्से को सही कर दिया जाएगा।
मेला प्रशासन का आरोप : यूपी सिंचाई विभाग ने छोड़ा अधिक पानी
इस पूरे मामले में सिंचाई विभाग और मेला प्रशासन ने लापरवाही का पूरा जिम्मा उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग पर डाल दिया है। मेला प्रशासन का आरोप है कि यूपी सिंचाई विभाग ने घाट निर्माण में सहयोग नहीं दिया। उनका आरोप है कि यूपी सिंचाई विभाग से काम के लिए समय मांगा गया था जो नहीं मिला। घाट के फाउंडेशन तैयार करने का काम वार्षिक बंदी में किया गया। मेला प्रशासन ने पहले दिन 4000 क्यूसेक पानी छोड़ने का अनुरोध किया था लेकिन यूपी सिंचाई विभाग ने जानबूझकर अधिक पानी छोड़ा। मेला प्रशासन का आरोप है कि अधिक पानी छोड़े जाने के कारण सीमेंट सामग्री के साथ सही तरीके से पकड़ नहीं बना पाया और फाउंडेशन उखड़ गया।
घाट निर्माण को लेकर कोई अनुमति नहीं ली गई थी। अवैध तरीके से घाट बनाए जा रहे थे। उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिकारी मनमानी कर घाट बना रहे हैं। गंगनहर बंदी का अधिकार शासन स्तर का है। दिल्ली समेत एनसीआर को पीने के पानी देने की बाध्यता के कारण क्लोजर की अवधि भी नहीं बढ़ाई जा सकती। आरोप निराधार हैं। -विकास त्यागी, अधिशासी अभियंता उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग’
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घाटों के निर्माण के दौरपन नींव उखड़ने और सरिये बाहर निकलने की घटना सामने आने के बाद पहले दिन शनिवार को मेलाधिकारी ने और दूसरे दिन रविवार को कई टीमों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। मामले का खुलासा होते ही ठेकेदार ने आनन-फानन में घटिया सामग्री के इस्तेमाल को छिपाने का प्रयास शुरू कर दिया। ठेकेदार ने श्रमिकों को गैंती और फावड़े के साथ मौके पर उतारा जिन्होंने तेजी से सबूत और साक्ष्य मिटाना शुरू कर दिया। श्रमिकों ने धारा के वेग से बहे मलबे के बीच गिरे सरियों को उठाकर सीधा किया। बिना सीमेंट बिखरे पड़े कंक्रीट को खोदकर गंगा में फेंका जाने लगा।
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इस पूरी प्रक्रिया में अधिकारियों की शुरुआती उदासीनता भी सामने आई है। उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता फिलहाल अवकाश पर हैं जबकि निरीक्षण के लिए मेला प्रशासन के साथ अधीक्षण अभियंता सुरेश तोमर पहुंचे। इस गंभीर लापरवाही पर फिलहाल उच्च स्तर से किसी अधिकारी से कोई स्पष्टीकरण नहीं लिया गया है।
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अधिशासी अभियंता ओमजी गुप्ता ने कहा कि घाट के लिए फाउंडेशन का निर्माण अल्प अवधि में किया गया लेकिन निर्माण कार्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी ठेकेदार की थी। उन्होंने दोहराया कि मानकों के अनुरूप काम नहीं मिलने पर फर्म को एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया जाएगा। ओमजी गुप्ता ने दावा किया है कि मंगलवार तक क्षतिग्रस्त हिस्से को सही कर दिया जाएगा।
मेला प्रशासन का आरोप : यूपी सिंचाई विभाग ने छोड़ा अधिक पानी
इस पूरे मामले में सिंचाई विभाग और मेला प्रशासन ने लापरवाही का पूरा जिम्मा उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग पर डाल दिया है। मेला प्रशासन का आरोप है कि यूपी सिंचाई विभाग ने घाट निर्माण में सहयोग नहीं दिया। उनका आरोप है कि यूपी सिंचाई विभाग से काम के लिए समय मांगा गया था जो नहीं मिला। घाट के फाउंडेशन तैयार करने का काम वार्षिक बंदी में किया गया। मेला प्रशासन ने पहले दिन 4000 क्यूसेक पानी छोड़ने का अनुरोध किया था लेकिन यूपी सिंचाई विभाग ने जानबूझकर अधिक पानी छोड़ा। मेला प्रशासन का आरोप है कि अधिक पानी छोड़े जाने के कारण सीमेंट सामग्री के साथ सही तरीके से पकड़ नहीं बना पाया और फाउंडेशन उखड़ गया।
घाट निर्माण को लेकर कोई अनुमति नहीं ली गई थी। अवैध तरीके से घाट बनाए जा रहे थे। उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिकारी मनमानी कर घाट बना रहे हैं। गंगनहर बंदी का अधिकार शासन स्तर का है। दिल्ली समेत एनसीआर को पीने के पानी देने की बाध्यता के कारण क्लोजर की अवधि भी नहीं बढ़ाई जा सकती। आरोप निराधार हैं। -विकास त्यागी, अधिशासी अभियंता उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग’