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आयुष प्रदेश में आयुर्वेद से ही होगा आर्थिक विकास : डॉ. अवनीश
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Iआयुष चिकित्सकों के संवाद में उत्तराखंड में आयुष चिकित्सा की नई पहचान पर हुई चर्चाI
आयुष विभाग ने चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में नई दृष्टि प्रस्तुत करते हुए संवाद किया। राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. अवनीश उपाध्याय ने कहा कि आयुष प्रदेश में आयुर्वेद के विकास से ही आर्थिक विकास तय होगा। उनहोंने उत्तराखंड में आयुष चिकित्सा की नई पहचान विषय पर विस्तार से अपना तर्क रखा।
डॉ. अवनीश उपाध्याय ने कहा कि राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष में आयुष विभाग ने भी चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में नई दृष्टि प्रस्तुत की है। प्रदेश के आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक चिकित्सक अब न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं बल्कि वह जनमानस के बीच सस्ती, सुलभ और सुरक्षित चिकित्सा पद्धति का भरोसा भी बढ़ा रहे हैं। शल्य रोग विशेषज्ञ व विज्ञान गोष्ठी सचिव डॉ. सोरमी ने कहा कि आयुर्वेद की शल्य चिकित्सा एक वृहद विज्ञान है। सर्वप्रथम शल्य क्रिया हमारे आचार्यों ने ही की। उन्होंने कहा कि आधुनिक मॉडर्न तकनीकें उसी आधार पर विकसित हुई हैं। आयुर्वेदिक सर्जरी को सीमित करने का कोई औचित्य नहीं है बल्कि इसे मुख्यधारा चिकित्सा में समान अवसर मिलने चाहिए।डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि रोगी की चिकित्सा का कार्य दोनों पद्धतियों एलोपैथी और आयुर्वेद का समान उद्देश्य है।
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आयुष विभाग ने चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में नई दृष्टि प्रस्तुत करते हुए संवाद किया। राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. अवनीश उपाध्याय ने कहा कि आयुष प्रदेश में आयुर्वेद के विकास से ही आर्थिक विकास तय होगा। उनहोंने उत्तराखंड में आयुष चिकित्सा की नई पहचान विषय पर विस्तार से अपना तर्क रखा।
डॉ. अवनीश उपाध्याय ने कहा कि राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष में आयुष विभाग ने भी चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में नई दृष्टि प्रस्तुत की है। प्रदेश के आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक चिकित्सक अब न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं बल्कि वह जनमानस के बीच सस्ती, सुलभ और सुरक्षित चिकित्सा पद्धति का भरोसा भी बढ़ा रहे हैं। शल्य रोग विशेषज्ञ व विज्ञान गोष्ठी सचिव डॉ. सोरमी ने कहा कि आयुर्वेद की शल्य चिकित्सा एक वृहद विज्ञान है। सर्वप्रथम शल्य क्रिया हमारे आचार्यों ने ही की। उन्होंने कहा कि आधुनिक मॉडर्न तकनीकें उसी आधार पर विकसित हुई हैं। आयुर्वेदिक सर्जरी को सीमित करने का कोई औचित्य नहीं है बल्कि इसे मुख्यधारा चिकित्सा में समान अवसर मिलने चाहिए।डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि रोगी की चिकित्सा का कार्य दोनों पद्धतियों एलोपैथी और आयुर्वेद का समान उद्देश्य है।
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