फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   special of ganga-dusshara day

राख बहाने के साथ समुद्र भरने को आईं गंगा

Thu, 28 May 2015 01:02 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/हरिद्वार
ब्यूरो, अमर उजाला/हरिद्वार Updated Thu, 28 May 2015 01:02 AM IST
विज्ञापन
special of ganga-dusshara day

गंगा दशहरे के दिन भगवती गंगा शिव की जटाओं से निकलकर धरती पर आईं थीं। गंगा के आने का प्रयोजन केवल 60 हजार सगर पुत्रों की राख बहाना नहीं था। वास्तव में गंगा को उन सप्त सिंधुओं को भी भरना था, जिन्हें सूर्य के आदेश पर अगस्त्य मुनि ने पी लिया था।

विज्ञापन


गंगा का जन्म ब्रह्मा के दरबार में राधा-कृष्ण के महारास से हुआ था। भगीरथ की प्रार्थना पर गंगा वैशाखा शुक्ल सप्तमी के दिन शिव की जटाओं में आईं। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा का आगमन शिव के जटाजूटों से धरा धाम पर हुआ। वास्तव में कपिल मुनि के श्राप से भस्म हुए इक्षवाकु वंशज सगर के 60 हजार पुत्र जलकर भस्म हो गए थे।
विज्ञापन


चूंकि सूर्य की कृपा से अगस्त्य मुनि ने तीन आचमन में सप्त सिंधुओं का समूचा जल पी लिया था, अत: सारे समुद्र खाली पड़े थे। भगीरथ को राख बहाने के साथ-साथ समुद्रों को भी जल से पुन: भरना था। जल की कमी के चलते धरा पर त्राहि-त्राहि मची हुई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


शिव की अनेक जटाओं से गंगा अनेक धाराओं में बंटकर गंगा दशहरे के दिन जमीन पर आईं। बहता हुआ सभी धाराओं का जल समुद्रों में मिला और समुद्र एक बार फिर से भर गए। महाभारत के वन पर्व में इस पूरी कथा का उल्लेख है। गंगा के सागर तट पर पहुंचते ही सगर पुत्रों की राख भी बह गई और धीरे-धीरे मुनि के पान से सूखे समुद्रों को भी जल मिल गया। धरती पर बिगड़ा वर्षा चक्र पुन: प्रारंभ हो गया। गंगा दशहरा धरती की हरियाली का भी प्रतीक है।

गंगा लाने को चार पीढिय़ों ने किया तप
गंगा अकेले भगीरथ ही नहीं लाए। श्रीराम के पुरखे सगर ने अपने 60 हजार पुत्र भस्म हो जाने पर गंगा को लाने के लिए शेष बचे पुत्र असमंजस को गंगा लाने का दायित्व सौंपा। असमंजस का जीवन बीत गया, गंगा नहीं आई। उनके पुत्र अंशुमान जीवन भर गंगा के लिए मार्ग बनाते रहे। गंगा फिर भी न आई।


अंशुमान के पुत्र राजा दिलीप का भी पूरा जीवन गंगा लाने में खप गया। अंतत: महा तपस्वी दिलीप के पुत्र भगीरथ शंखनाद करते हुए गंगा को दशहरे के दिन धरती पर ले आए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed