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प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तर्ज पर काम करता था सतीश
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हरिद्वार। खबर फिल्मी नहीं है। पूरी तरह से सोलह आने सच है। ज्वैलर्स शोरूम में डकैती डालने वाला गैंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तर्ज पर चलता था। गैंग में लूट करने का काम किया और का होता था, जबकि लूट का माल ले जाने वाले दूसरे होते थे। कई जगहों पर माल की अदला-बदली होती थी ताकि किसी गैंग के भी किसी सदस्य को यह पता न चल पाए कि घटना कहां पर हुई है और माल कहां पर खपाया गया है।
ज्वालापुर स्थित शंकर आश्रम के पास स्थित मोरातारा ज्वैलर्स शोरूम में डकैती डालने वाला ताऊ गैंग उत्तर भारत का सबसे खूंखार गैंग है। गैंग के मुखिया इंद्रपाल चौधरी उर्फ ताऊ के जेल जाने के बाद अब उसका नेतृत्व उसका भांजा सतीश चौधरी कर रहा था। सतीश गैंग को पूरी तरह से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तर्ज पर चला रहा था। इसके लिए उसने अलग-अलग टीमें बनाई हुई थीं। घटनास्थल पर रेकी करने के लिए दूसरी टीम जाती थी। इसके बाद वाहन और हथियार उपलब्ध कराने के लिए दूसरी टीम थी। घटना को अंजाम देने के लिए दूसरे सदस्य भेजे जाते थे। लूट के माल को दूसरे सदस्यों को दिया जाता था। इसके बाद वह सतीश के पास तक पहुंचता था।
अपने बैग में ज्यादा सामान भरवाता था सतीश
सतीश चौधरी अपने बैग में सबसे ज्यादा माल भरवाता था। इसके बाद उस बैग को खुद ही लेकर जाता था। वारदात करने से एक सप्ताह पहले गैंग के सदस्य अपना ठिकाना बदल लेते थे ताकि कोई इन पर शक न करे।
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कई बातों का रखा जाता था ध्यान
हरिद्वार। डकैती डालने से पहले सतीश कई बार रेकी कर दुकान में सामान की उपलब्धता और उसकी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेता था। इसके साथ ही यह भी देखता था कि घटना के लिए कौन सा समय बेहतर रहेगा।
एक या दो लोगों से करता था जानकारी साझा
सतीश चौधरी घटना की योजना को गोपनीय रखते हुए केवल एक या दो लोगों से ही जानकारी साझा करता था। आमतौर पर गैंग में नए-नए सदस्यों को शामिल किया जाता था, जिससे उनके पकड़े जाने पर सतीश के बारे में किसी को कोई जानकारी न मिले।
गैंग में किसका क्या था काम
अमित फौजी : लूट की घटना में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों को उपलब्ध कराने का काम करता था। इस घटना में भी अमित फौजी ने दो वाहनों की व्यवस्था की थी।
प्रदीप राठौर : गैंग के इस सदस्य का काम घटना से पहले प्रतिष्ठान में रखे गए माल की कीमत आंकने और घटना के बाद लूटे गए माल को ठिकाने लगाने का था।
सचिन उर्फ गुड्डू : इसका काम लूट की घटना के लिए अवैध असलाह उपलब्ध करवाना था। यह अमित फौजी का भांजा है।
सतेंद्र पाल सिंह : लूट का माल ठिकाने लगाने वाला सुनार।
नितिन मलिक : सतीश चौधरी गैंग का कोर सदस्य।
हिमांशु त्यागी : गैंग में नए सदस्यों की भर्ती करना, सतीश चौधरी और नए सदस्यों के बीच में कम्यूनिकेशन का माध्यम बनना।
विकास उर्फ हिमांशु : घटना करने, माल ठिकाने लगाने में माहिर।
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ज्वालापुर स्थित शंकर आश्रम के पास स्थित मोरातारा ज्वैलर्स शोरूम में डकैती डालने वाला ताऊ गैंग उत्तर भारत का सबसे खूंखार गैंग है। गैंग के मुखिया इंद्रपाल चौधरी उर्फ ताऊ के जेल जाने के बाद अब उसका नेतृत्व उसका भांजा सतीश चौधरी कर रहा था। सतीश गैंग को पूरी तरह से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तर्ज पर चला रहा था। इसके लिए उसने अलग-अलग टीमें बनाई हुई थीं। घटनास्थल पर रेकी करने के लिए दूसरी टीम जाती थी। इसके बाद वाहन और हथियार उपलब्ध कराने के लिए दूसरी टीम थी। घटना को अंजाम देने के लिए दूसरे सदस्य भेजे जाते थे। लूट के माल को दूसरे सदस्यों को दिया जाता था। इसके बाद वह सतीश के पास तक पहुंचता था।
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अपने बैग में ज्यादा सामान भरवाता था सतीश
सतीश चौधरी अपने बैग में सबसे ज्यादा माल भरवाता था। इसके बाद उस बैग को खुद ही लेकर जाता था। वारदात करने से एक सप्ताह पहले गैंग के सदस्य अपना ठिकाना बदल लेते थे ताकि कोई इन पर शक न करे।
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कई बातों का रखा जाता था ध्यान
हरिद्वार। डकैती डालने से पहले सतीश कई बार रेकी कर दुकान में सामान की उपलब्धता और उसकी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेता था। इसके साथ ही यह भी देखता था कि घटना के लिए कौन सा समय बेहतर रहेगा।
एक या दो लोगों से करता था जानकारी साझा
सतीश चौधरी घटना की योजना को गोपनीय रखते हुए केवल एक या दो लोगों से ही जानकारी साझा करता था। आमतौर पर गैंग में नए-नए सदस्यों को शामिल किया जाता था, जिससे उनके पकड़े जाने पर सतीश के बारे में किसी को कोई जानकारी न मिले।
गैंग में किसका क्या था काम
अमित फौजी : लूट की घटना में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों को उपलब्ध कराने का काम करता था। इस घटना में भी अमित फौजी ने दो वाहनों की व्यवस्था की थी।
प्रदीप राठौर : गैंग के इस सदस्य का काम घटना से पहले प्रतिष्ठान में रखे गए माल की कीमत आंकने और घटना के बाद लूटे गए माल को ठिकाने लगाने का था।
सचिन उर्फ गुड्डू : इसका काम लूट की घटना के लिए अवैध असलाह उपलब्ध करवाना था। यह अमित फौजी का भांजा है।
सतेंद्र पाल सिंह : लूट का माल ठिकाने लगाने वाला सुनार।
नितिन मलिक : सतीश चौधरी गैंग का कोर सदस्य।
हिमांशु त्यागी : गैंग में नए सदस्यों की भर्ती करना, सतीश चौधरी और नए सदस्यों के बीच में कम्यूनिकेशन का माध्यम बनना।
विकास उर्फ हिमांशु : घटना करने, माल ठिकाने लगाने में माहिर।