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Haridwar News: श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में संतों ने किया शस्त्र पूजन
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बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व विजयदशमी के पर्व पर कनखल स्थित श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के संतों ने शस्त्र पूजन किया। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष एवं महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज के नेतृत्व में अखाड़े के संतों ने विधि विधान से अखाड़े के देवता सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश भालों व अन्य शस्त्रों का पूजन कर सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया। पंडित अवधेश शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शस्त्र पूजन कराया।
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश अखाड़े के देवता हैं। प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा के तहत विजयदशमी पर अखाड़े के देवता सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश के साथ अखाड़े के प्राचीन व आधुनिक शस्त्रों का पूजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि बुराई का अंत करने के लिए ज्ञान के साथ शस्त्र की भी आवश्यकता होती है। आदि गुरु शंकराचार्य ने धर्म रक्षा के लिए नागा सन्यासियों को संगठित कर अखाड़ों का गठन किया और शास्त्र ज्ञान के साथ शस्त्र ज्ञान का विधान भी स्थापित किया। उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए नागा संन्यासियों ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए शास्त्र के साथ शस्त्र धारण किए और आक्रांताओं का मुकाबला किया।
इस मौके पर महंत कैलाश भारती, श्रीमहंत मनोज गिरि, महंत विनोद गिरि उर्फ हनुमान बाबा, स्वामी ज्ञान भारती, स्वामी हरिशंकर गिरि, स्वामी किशनपुरी, स्वामी कुंदन पुरी महाराज आदि मौजूद रहे।
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अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश अखाड़े के देवता हैं। प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा के तहत विजयदशमी पर अखाड़े के देवता सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश के साथ अखाड़े के प्राचीन व आधुनिक शस्त्रों का पूजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि बुराई का अंत करने के लिए ज्ञान के साथ शस्त्र की भी आवश्यकता होती है। आदि गुरु शंकराचार्य ने धर्म रक्षा के लिए नागा सन्यासियों को संगठित कर अखाड़ों का गठन किया और शास्त्र ज्ञान के साथ शस्त्र ज्ञान का विधान भी स्थापित किया। उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए नागा संन्यासियों ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए शास्त्र के साथ शस्त्र धारण किए और आक्रांताओं का मुकाबला किया।
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इस मौके पर महंत कैलाश भारती, श्रीमहंत मनोज गिरि, महंत विनोद गिरि उर्फ हनुमान बाबा, स्वामी ज्ञान भारती, स्वामी हरिशंकर गिरि, स्वामी किशनपुरी, स्वामी कुंदन पुरी महाराज आदि मौजूद रहे।
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