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रवासन नदी में पानी बढ़ा, गांवों का संपर्क टूटा
अमर उजाला ब्यूरो श्यामपुर
Updated Mon, 12 Sep 2016 11:42 PM IST
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Rvasan pushing water into the river, the villages falling
- फोटो : amarujala
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लालढांग में रवासन नदी में अचानक पानी बढ़ने से लोगों को खासी मुश्किलें हुई। बच्चे नदी के दूसरी ओर स्थित स्कूल में नहीं जा सके। जबकि नदी के दोनों ओर बसे गांवों के लोग भी वहीं कैद होकर रह गए। नदी पार कराने वाले ट्रैक्टर ट्राली के नदी में फंसने से उसमें बैठे लोगों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। हालांकि उन्हें दूसरी ओर सुरक्षित पहुंचा दिया गया।
सोमवार सुबह रवासन नदी में अचानक पानी बढ़ने से लोग पैदल इधर-उधर नहीं जा सके। नदी के पश्चिम ओर ग्राम रसूलपुर मिठीबेरी, डंढियानवाला, मंगूलपुरा है। जबकि पूरब दिशा में लालढांग, कोटद्वार, हरिद्वार आदि क्षेत्रों के लिए नदी को पार करना पड़ता है। पश्चिम दिशा की ओर स्थित गांवों के बच्चे पढ़ने के लिए लालढांग और हरिद्वार आते है। सोमवार को नदी में पानी बढ़ने से बच्चे स्कूल नहीं जा सके। बाजार जाने के लिए लोग नदी पार करने के लिए ट्रैक्टर ट्राली लेकर आए। ट्राली में बैठकर लोग नदी पार करने लगे तो तेज बहाव से ट्राली पानी के साथ बहकर घूमने लगी। इससे लोगों में अफरा-तफरी मची रही। जैसे-तैसे कर लोगों ने अपना बचाव किया। ट्रैक्टर में भी पानी भरने से इंजन बंद हो गया और ट्रैक्टर-ट्राली वहीं पर फंसा रह गया।
कहां रह गया पुल निर्माण का शासनादेश
कांग्रेसी नेता 15 दिनों से शोर मचा रहे हैं कि रवासन नदी पर पुल बनाने के लिए शासनादेश जारी हो गया है। उन्होंने नदी किनारे पहुंचकर ढोल नगाड़े बजाकर मिठाई भी बांटी। ग्रामीण आलोक द्विवेदी, सुरेंद्र रावत, विनोद जोशी, संतराम, देवेंद्र आदि का कहना है कि हम तो यही देखते है कि सिर्फ नेता लोग शोर ही मचाते हैं। कांग्रेस नेता राजेश रस्तोगी, गुरजीत लहरी आदि नेताओं ने भी कई बार दावा किया कि पुल निर्माण के लिए शासनादेश जारी हो गया। भाजपा विधायक स्वामी यतीश्वरानंद का कहना है कि खोखला आश्वासन दिया जाता है। उनके प्रयास से पीडब्ल्यूडी ने तीन बार पुल निर्माण के लिए इस्टीमेट भेजा है, लेकिन सीएम शासनादेश नहीं कर रहे है।
सोमवार सुबह रवासन नदी में अचानक पानी बढ़ने से लोग पैदल इधर-उधर नहीं जा सके। नदी के पश्चिम ओर ग्राम रसूलपुर मिठीबेरी, डंढियानवाला, मंगूलपुरा है। जबकि पूरब दिशा में लालढांग, कोटद्वार, हरिद्वार आदि क्षेत्रों के लिए नदी को पार करना पड़ता है। पश्चिम दिशा की ओर स्थित गांवों के बच्चे पढ़ने के लिए लालढांग और हरिद्वार आते है। सोमवार को नदी में पानी बढ़ने से बच्चे स्कूल नहीं जा सके। बाजार जाने के लिए लोग नदी पार करने के लिए ट्रैक्टर ट्राली लेकर आए। ट्राली में बैठकर लोग नदी पार करने लगे तो तेज बहाव से ट्राली पानी के साथ बहकर घूमने लगी। इससे लोगों में अफरा-तफरी मची रही। जैसे-तैसे कर लोगों ने अपना बचाव किया। ट्रैक्टर में भी पानी भरने से इंजन बंद हो गया और ट्रैक्टर-ट्राली वहीं पर फंसा रह गया।
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कहां रह गया पुल निर्माण का शासनादेश
कांग्रेसी नेता 15 दिनों से शोर मचा रहे हैं कि रवासन नदी पर पुल बनाने के लिए शासनादेश जारी हो गया है। उन्होंने नदी किनारे पहुंचकर ढोल नगाड़े बजाकर मिठाई भी बांटी। ग्रामीण आलोक द्विवेदी, सुरेंद्र रावत, विनोद जोशी, संतराम, देवेंद्र आदि का कहना है कि हम तो यही देखते है कि सिर्फ नेता लोग शोर ही मचाते हैं। कांग्रेस नेता राजेश रस्तोगी, गुरजीत लहरी आदि नेताओं ने भी कई बार दावा किया कि पुल निर्माण के लिए शासनादेश जारी हो गया। भाजपा विधायक स्वामी यतीश्वरानंद का कहना है कि खोखला आश्वासन दिया जाता है। उनके प्रयास से पीडब्ल्यूडी ने तीन बार पुल निर्माण के लिए इस्टीमेट भेजा है, लेकिन सीएम शासनादेश नहीं कर रहे है।
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