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रूस-यूक्रेन युद्ध से उद्योगों पर संकट के बादल
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रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की वजह से हरिद्वार के उद्योगों पर भी संकट के बादल छाने लगे हैं। खासकर यूक्रेन से आयात होने वाले कच्चे माल, तेल और रसायनों की आपूर्ति बंद होने से आने वाले दिनों में फैक्टरियों में उत्पादन बाधित हो सकता है। वहीं, क्रूड ऑयल के दाम 30 फीसदी तक बढ़ने से भी उत्पादन लागत पर असर पड़ेगा।
हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल में स्थापित फार्मा कंपनियों के अलावा अन्य औद्योगिक इकाइयों जैसे लोहे का सामान बनाने वाली कंपनियां, ब्यूटी प्रोडक्ट, परफ्यूम की फैक्टरियों में यूक्रेन से विभिन्न बंदरगाहों के रास्ते कच्चा तेल, रसायन और लौह अयस्क आदि का आयात होता है। इनका इस्तेमाल जिले की केमिकल और अन्य फैक्टरियों में किया जाता है। युद्ध के कारण बंदरगाहों पर करोड़ों रुपये का माल फंसा हुआ है।
उद्योगपतियों का कहना है कि बंदरगाहों पर फंसे सामान को पहुंचने में वक्त लग सकता है। इससे परेशानी बढ़ेगी। औद्योगिक इकाइयों के स्वामियों का कहना है कि यहां के उद्योगों की भंडारण क्षमता कम है। उद्योगों में खतरनाक और ज्वलनशील रसायनों का भंडारण 10 दिन से अधिक नहीं किया जा सकता है। कच्चे माल के आयात में देरी से फैक्टरियों का उत्पादन बाधित हो सकता है। हरिद्वार के सिडकुल व भगवानपुर की फैक्टरियों में तैयार होने वाले उत्पादों के लिए कच्चा माल बड़े पैमाने पर यूक्रेन से आयात होता है।
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रूस-यूक्रेन हमले के बाद काफी दिक्कतें आ रही हैं। एल्युमीनियम न मिलने की वजह से पैकिंग में दिक्कत आ रही है। कच्चा माल भी बदंरगाहों पर फंसा पड़ा है। - अनिल शर्मा, अध्यक्ष एसोसिएशन ऑफ फार्मास्युटिकल्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज सिडकुल
कच्चा माल महंगा हो गया है। तीन दिन में आठ से 20 फीसदी रेट बढ़ गए हैं। इसमें कॉपर, एल्युमीनियम, स्टील, प्लास्टिक के दाने की सबसे ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं। - राज अरोड़ा महासचिव सिडकुल मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन
युद्ध का इंडस्ट्रीज पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। आने वाले समय में इसके परिणाम सभी को भुगतने पड़ेंगे। कच्चा माल महंगा हो रहा है। - हिमेश कपूर अध्यक्ष सिडकुल वेलफेयर एसोसिएशन
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हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल में स्थापित फार्मा कंपनियों के अलावा अन्य औद्योगिक इकाइयों जैसे लोहे का सामान बनाने वाली कंपनियां, ब्यूटी प्रोडक्ट, परफ्यूम की फैक्टरियों में यूक्रेन से विभिन्न बंदरगाहों के रास्ते कच्चा तेल, रसायन और लौह अयस्क आदि का आयात होता है। इनका इस्तेमाल जिले की केमिकल और अन्य फैक्टरियों में किया जाता है। युद्ध के कारण बंदरगाहों पर करोड़ों रुपये का माल फंसा हुआ है।
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उद्योगपतियों का कहना है कि बंदरगाहों पर फंसे सामान को पहुंचने में वक्त लग सकता है। इससे परेशानी बढ़ेगी। औद्योगिक इकाइयों के स्वामियों का कहना है कि यहां के उद्योगों की भंडारण क्षमता कम है। उद्योगों में खतरनाक और ज्वलनशील रसायनों का भंडारण 10 दिन से अधिक नहीं किया जा सकता है। कच्चे माल के आयात में देरी से फैक्टरियों का उत्पादन बाधित हो सकता है। हरिद्वार के सिडकुल व भगवानपुर की फैक्टरियों में तैयार होने वाले उत्पादों के लिए कच्चा माल बड़े पैमाने पर यूक्रेन से आयात होता है।
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रूस-यूक्रेन हमले के बाद काफी दिक्कतें आ रही हैं। एल्युमीनियम न मिलने की वजह से पैकिंग में दिक्कत आ रही है। कच्चा माल भी बदंरगाहों पर फंसा पड़ा है। - अनिल शर्मा, अध्यक्ष एसोसिएशन ऑफ फार्मास्युटिकल्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज सिडकुल
कच्चा माल महंगा हो गया है। तीन दिन में आठ से 20 फीसदी रेट बढ़ गए हैं। इसमें कॉपर, एल्युमीनियम, स्टील, प्लास्टिक के दाने की सबसे ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं। - राज अरोड़ा महासचिव सिडकुल मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन
युद्ध का इंडस्ट्रीज पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। आने वाले समय में इसके परिणाम सभी को भुगतने पड़ेंगे। कच्चा माल महंगा हो रहा है। - हिमेश कपूर अध्यक्ष सिडकुल वेलफेयर एसोसिएशन