{"_id":"9a531efc9208ec7c47eeb19fd5c54d8c","slug":"reservations-done-the-math-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरक्षण ने बिगाड़ा गणित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरक्षण ने बिगाड़ा गणित
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 16 Nov 2015 12:20 AM IST
विज्ञापन
पथरी। ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) और जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने वाले कई लोगों (नेताओं) का खेल आरक्षण ने बिगाड़ दिया है। शनिवार को जारी अंनतिम सूची से कई दावेदारों के अरमानों पर पानी फिर गया है। लाखों रुपये फूंकने के बाद यह अब समर्थकों को मैदान में उतारने की फिराक में हैं।
विज्ञापन
भगतनपुर आबिदपुर जिला पंचायत सदस्य सीट पर कांग्रेस के प्रदेश सचिव महावीर रावत, जिला पंचायत सदस्य अनिता खरोला, बसपा नेता जयंत चौहान एवं भाजपा नेता दिनेश चौहान चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी में थे। लेकिन यह सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित होने पर इन सभी के अरमानों पर पानी फिर गया है। अब इस सीट पर केवल एक दमदार दावेदार नजर आ रहे हैं।
विज्ञापन
धनपुरा में ग्राम प्रधान पद के लिए कई लोग चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। एक युवक तो चुनाव को लेकर समाजसेवा में लाखों रुपये खर्च भी कर चुका है। लेकिन अब यह सीट एससी के लिए आरक्षित हो गई है। आदर्श टिहरी नगर क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर एक कांग्रेस नेता (जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि) चुनाव लड़ने की तैयारी में था। यह सीट एससी में आरक्षित होने पर इस कांग्रेस नेता के अलावा कई लोगों को चुनाव लड़ने से वंचित रहना पड़ेगा।
विज्ञापन
अब समर्थकों को उतारेंगे
बहादराबाद। ग्राम प्रधान नीरज चौहान आगामी चुनाव के लिए तैयारी कर रहे थे, लेकिन बहादराबाद ग्राम पंचायत सीट अनुसूचित जाति महिला वर्ग में चली गई हैं। इसके अलावा वह ब्लाक प्रमुख की भी तैयारी में थे, लेकिन प्रमुख की सीट भी अनुसूचित जाति में जाने से उनकी यह उम्मीद भी धराशायी हो गई है। बहादराबाद ग्राम सभा से कृष्ण कुमार जिला पंचायत सदस्य चुनाव के लिए तैयारी कर रहे थे उन्होंने जगह-जगह अपने बोर्ड भी लगवा दिए थे, लेकिन सीट अनुसूचित जाति महिला वर्ग में जाने से उनके अरमानों पर भी पानी फिर गया है। अब वह अपने समर्थक या पत्नी को उतारेंगे।
यहां भी कई घर बैठे
धनौरी। क्षेत्र के शिवदासपुर तेलीवाला गांव की सीट ग्राम प्रधान की ओबीसी में आने के बाद गांव के महेंद्र सिंह के अरमानों पर पानी फिर गया है। पिछली सीट गांव की एससी में थी, जिसमें महेंद्र सिंह की पत्नी चुनाव में हार गई थी। महेंद्र सिंह तभी से समाज सेवा में जुटे थे। बीडीसी के लिए तैयारी कर रहे समाजसेवी विनोद कुमार के अरमान भी धरे रह गए। धनौरा गांव में लंबे समय बाद प्रधान पद एससी सीट के लिए आरक्षित किया गया है। इससे वर्तमान प्रधान सविता सैनी के बिना चुनाव लड़े रिटायर हो जाएंगी। परमित सैनी भी पांच सालों से तैयारी कर रहा था, लेकिन अब वह अपने समर्थकों के साथ है।