जंगली जानवरों से फसल बचाने को बने प्लान
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हरिद्वार। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के तीन दिन से चले किसान महाकुंभ में कई मुद्दों पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री को भेजे गए नौ सूत्री ज्ञापन में जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को बड़ी समस्या बताते हुए इसके लिए वृहद कार्ययोजना बनाने की मांग की गई। किसान यूनियन ने किसान आयोग का गठन करने, फसल बीमा योजना में एक किसान को एक इकाई मानने, बकाया गन्ना भुगतान व जैव परिवर्तित फसलों के उत्पादन पर रोक लगाने की मांग की। किसान कुंभ में एक बात साफ दिखी की केंद्र की मोदी सरकार के दो साल के कार्यकाल से भी किसान असंतुष्ट ही दिखे।
मंडल अध्यक्ष संजय चौधरी और जिलाध्यक्ष रवि चौधरी ने बताया कि किसान महाकुंभ में हुई कार्यकारिणी की बैठक में किसानों ने ये भी विचार किया कि सरकारें उनकी मांगों को गंभीरतापूर्वक नहीं सुनेंगी तो किसान गेहूं, धान व गन्ने की फसलों का उत्पादन कम कर देंगे। उन्होंने बताया कि नौ सूत्री ज्ञापन केन्द्र को भेजने के साथ ही 11 सूत्रीय ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा गया। जिसमें काशीपुर के एस्कार्ट फार्म में भाकियू और सरकार के बीच समझौते के तहत किसानों को भूमिधरी का अधिकार, पहाड़ में रहने वाले लोगों को पर्वतीय भत्ता देने, पहाड़ में चकबंदी कराने, नलकूप के बिजली कनेक्शन का मासिक किराया समाप्त कर पचास पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराने, भारत चीन सीमा पर लोगों का पलायन रोकने के लिए अनुसूचित जनजाति का दर्जा व सुख सुविधाएं देने की मांग की गई हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि किसान यूनियन समय समय पर अब पर्वतीय क्षेत्रों में भी पंचायतें करेगी।