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जंगल बचाने में पैंगोलिन का अहम योगदान
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विश्व पैंगोलिन दिवस पर लोगों से पैंगोलिन बचाने का आह्वान किया। कहा कि जंगल बचाने में पैंगोलिन का अहम योगदान है।
राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज के रानीपुर गेट पर शनिवार को विश्व पैंगोलिन दिवस पर दिल्ली से पहुंचे वन्य जीव विशेषज्ञ प्रभात मेहता ने कहा कि पैंगोलिन का जंगल को दीमक से सुरक्षित रखने में बेहद योगदान है। पैैंगोलिन चींटी और दीमक ही खाता है। जिससे दीमक जंगल में ज्यादा फैल नहीं पाती है। लेकिन आज पैंगोलिन की संख्या कम हो रही है। जो बड़ा ही चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर पैंगोलिन के शिकार को रोकना होगा।
रेंजर विजय कुमार सैनी ने कहा कि पैंगोलिन को साधारण भाषा में सांप जैसी आकृति होने की वजह से सल्लू सांप भी कहा जाता है। कुछ लोग इस जीव को चींटीखोर भी कहते हैं। ये जीव उन संकटग्रस्त जीवों की प्रजाति में शामिल है। जिनकी संख्या दिनों-दिन घटती जा रही है। ये एक बेहद सीधा जीव है जो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है। पैंगोलिन मुख्य रूप से उत्तराखंड में पाए जाते हैं। ये जलीय स्रोतों के आसपास जमीन में बिल बनाकर रहते हैं। ये ज्यादातर एकाकी जीवन जीते हैं। सामाजिक संस्था के आदित्य शर्मा ने कहा कि पैंगोलिन जीव की प्रजाति के मिट रहे अस्तित्व को बचाना है। इस मौके पर वन दारोगा समुंदर सिंह, अमरपाल सिंह, फरमान अली, रूपा शर्मा, ईको विकास समिति अध्यक्ष अमरनाथ आदि मौजूद रहे।
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राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज के रानीपुर गेट पर शनिवार को विश्व पैंगोलिन दिवस पर दिल्ली से पहुंचे वन्य जीव विशेषज्ञ प्रभात मेहता ने कहा कि पैंगोलिन का जंगल को दीमक से सुरक्षित रखने में बेहद योगदान है। पैैंगोलिन चींटी और दीमक ही खाता है। जिससे दीमक जंगल में ज्यादा फैल नहीं पाती है। लेकिन आज पैंगोलिन की संख्या कम हो रही है। जो बड़ा ही चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर पैंगोलिन के शिकार को रोकना होगा।
रेंजर विजय कुमार सैनी ने कहा कि पैंगोलिन को साधारण भाषा में सांप जैसी आकृति होने की वजह से सल्लू सांप भी कहा जाता है। कुछ लोग इस जीव को चींटीखोर भी कहते हैं। ये जीव उन संकटग्रस्त जीवों की प्रजाति में शामिल है। जिनकी संख्या दिनों-दिन घटती जा रही है। ये एक बेहद सीधा जीव है जो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है। पैंगोलिन मुख्य रूप से उत्तराखंड में पाए जाते हैं। ये जलीय स्रोतों के आसपास जमीन में बिल बनाकर रहते हैं। ये ज्यादातर एकाकी जीवन जीते हैं। सामाजिक संस्था के आदित्य शर्मा ने कहा कि पैंगोलिन जीव की प्रजाति के मिट रहे अस्तित्व को बचाना है। इस मौके पर वन दारोगा समुंदर सिंह, अमरपाल सिंह, फरमान अली, रूपा शर्मा, ईको विकास समिति अध्यक्ष अमरनाथ आदि मौजूद रहे।
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