{"_id":"e1e1d7ad48d4db57b738fd279b989f91","slug":"nothing-in-the-world-of-science-west-pandey-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विज्ञान की दुनिया में कुछ भी नहीं वेस्ट: पांडेय ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विज्ञान की दुनिया में कुछ भी नहीं वेस्ट: पांडेय
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
Updated Fri, 06 Nov 2015 12:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) के निदेशक यादवेंद्र पांडे ने वेस्ट मेटीरीयल के जरिए भवन निर्माण की सामग्री पर संस्थान में हो रहे कार्यों की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान की नजर में दुनिया में कुछ भी वेस्ट मेटीरियल नहीं है।
विज्ञापन
ऐसे में वैज्ञानिकों का दायित्व है कि वह वेस्ट पदार्थों को उपयोगी बनाए। ताकि देश में न केवल वेस्ट मेटीरीयल से होने वाली गंदगी, बीमारी और दूषित पर्यावरण की समस्या को दूर किया जा सके बल्कि इसके जरिए देश के विकास मार्ग भी प्रशस्त हो सके।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को संस्थान में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान संस्थान निदेशक यादवेंद्र पांडे के निर्देशन में प्रधान वैज्ञानिकों ने वेस्ट मेटीरीयल से बनाई गई टाईल्स, ईंट एवं लकड़ी के विकल्प के तौर पर चावलों की भूसी और प्लास्टिक से तैयार दरवाजों एवं चौखट आदि फ्रेम का प्रदर्शन किया। वहीं प्रधान वैज्ञानिक रजनी लखानी ने राजस्थान में पाए जाने वाले कोटा नामक पत्थर के अपशिष्ट से फर्श की टाइल्स बनाने की तकनीकी की जानकारी दी।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि राजस्थान में कोटा स्टोन के करीब 300 उद्योग है। जिनमें हर दिन निकलने वाले करीब 10 मिलियन टन अपशिष्ट पदार्थ निकलता है। जिसके कारण 363 माइक्रोन आकार के कणों से वायु प्रदूषण एवं सांस संबंधी समस्याएं पैदा हो रही थी।
साथ भूमि की उर्वरा शक्ति में भी कमी आ रही थी। जिसके चलते इस अपशिष्ट से टाइल्स का निर्माण किया गया। इन टाइलों को छतों पर लगाने से कमरे के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। जो ग्रीन बिल्डिंग मानकों के लिए सहयोगी होगी। वहीं प्रधान वैज्ञानिक एके मिनौचा ने विभिन्न अपशिष्ट पदार्थों से टाइल्स एवं ईंटों की तकनीक बताई। प्रधान वैज्ञानिक सुवीर सिंह ने प्लास्टिक एवं चावल की भूसी से बनाए गए दरवाजों के फ्रेम का प्रदर्शन किया। यह तकनीक वृक्षों के संरक्षण में काफी मददगार साबित होगी।