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खेलों में अधिक पदक दिलाएगी नई नई शिक्षा नीति: कुठियाल
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उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से नई शिक्षा नीति के एक वर्ष पूरे होने पर चल रही वेबिनार के समापन अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता उच्च शिक्षा विभाग हरियाणा के अध्यक्ष प्रो. बीके कुठियाल ने कहा कि शिक्षा नीति में खेलों को महत्व दिया गया है। यदि यह शिक्षा नीति अपने मौलिक स्वरूप में लागू होती है तो देश के युवा खेल के क्षेत्र में बड़ी संख्या में पदक लाने मेें सफल होंगे।
सोमवार को हुई गोष्ठी में उन्होंने कहा कि प्रत्येक बालक में विशेष प्रतिभाएं छुपी होती हैं। यह एक शिक्षक का दायित्व बन जाता है कि वह विद्यार्थी की उस प्रतिभा को पहचाने। जब एक शिक्षक अपने विद्यार्थी को योग्यता को पहचान लेता है तो नरेंद्र जैसे विद्यार्थी को स्वामी विवेकानंद बनने में समय नहीं लगता। नई शिक्षा नीति युवा शक्ति को जिज्ञासाओं को शांत करने और उन्हें बढ़ावा देती है। शिक्षकों को भी इस बात पर बल देना चाहिए कि विद्यार्थियों में खेल-प्रवृत्ति का विकास हो और प्रशासन संबंधित सुविधाओं के समुचित विकास में प्रयत्नशील रहे। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि प्रकृति सभी विद्यार्थियों को विशेष बुद्धि और योग्यता प्रदान करती है। अब यह आवश्यक हो जाता है कि शिक्षक वर्ग ऐसे विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाकर उनकी ऊर्जा को सही उद्देश्य में निर्देशित करे। वेबीनार में कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी, डॉ. सुमन प्रसाद भट्ट, डॉ. बिंदुमती द्विवेदी, डॉ. विनय कुमार सेठी, डॉ. अजय परमार, डॉ. श्वेता अवस्थी, अमित थपलियाल, आशीष पोखरियाल, दीपक रतूड़ी, अनूप बहुखंडी, विनोद कुमार, राकेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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सोमवार को हुई गोष्ठी में उन्होंने कहा कि प्रत्येक बालक में विशेष प्रतिभाएं छुपी होती हैं। यह एक शिक्षक का दायित्व बन जाता है कि वह विद्यार्थी की उस प्रतिभा को पहचाने। जब एक शिक्षक अपने विद्यार्थी को योग्यता को पहचान लेता है तो नरेंद्र जैसे विद्यार्थी को स्वामी विवेकानंद बनने में समय नहीं लगता। नई शिक्षा नीति युवा शक्ति को जिज्ञासाओं को शांत करने और उन्हें बढ़ावा देती है। शिक्षकों को भी इस बात पर बल देना चाहिए कि विद्यार्थियों में खेल-प्रवृत्ति का विकास हो और प्रशासन संबंधित सुविधाओं के समुचित विकास में प्रयत्नशील रहे। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि प्रकृति सभी विद्यार्थियों को विशेष बुद्धि और योग्यता प्रदान करती है। अब यह आवश्यक हो जाता है कि शिक्षक वर्ग ऐसे विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाकर उनकी ऊर्जा को सही उद्देश्य में निर्देशित करे। वेबीनार में कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी, डॉ. सुमन प्रसाद भट्ट, डॉ. बिंदुमती द्विवेदी, डॉ. विनय कुमार सेठी, डॉ. अजय परमार, डॉ. श्वेता अवस्थी, अमित थपलियाल, आशीष पोखरियाल, दीपक रतूड़ी, अनूप बहुखंडी, विनोद कुमार, राकेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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