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रिपोर्ट दर्ज नहीं की, भगा दिया
hridwar uttrakhanda india
Updated Tue, 31 Jan 2017 11:56 PM IST
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सिंचाई विभाग के कर्मचारियों का आरोप है कि खैर के पेड़ों को काटकर चोरी के मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय उन्हें ही उल्टा डांट दिया। चंडीघाट क्षेत्र में गंगा नदी एवं पूर्वी गंगा नहर के बीच की तलहटी के प्रतिबंधित प्रजाति के खैर के जंगल से दो महीने मे ही 44 पेड़ काटे जा चुके हैं।
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सिंचाई विभाग के रिकार्ड के अनुसार दो महीने में खैर के 44 हरे पेड़ काट कर चोरी हे चुके हैं। काटे गए पेड़ों की कीमत 50 लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है। पुलिस और वन विभाग की चेकपोस्ट होने के बाद भी खैर के पेड़ काटकर ले जाने से सिंचाई विभाग के अधिकारी हैरान हैं। सिंचाई विभाग की तहरीर पर खैर चोरी की रिपोर्ट तक दर्ज करने में आनाकानी से भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अब सिंचाई विभाग के अधिकारी खैर के पेड़ों की चोरी की विस्तृत रिपोर्ट लेकर जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। आरोप है कि रविवार को खैर के 17 पेड़ों को काटकर चोरी होने की जानकारी देने सिंचाई विभाग के कर्मचारी श्यामपुर पुलिस के पास पहुंचे तो उन्हें उलटा बंद करने की धमकी दी गई। इसके बाद मंगलवार को सुबह सिंचाई खंड हरिद्वार के अधिशासी अभियंता डीके सिंह व उप राजस्व अधिकारी एनएस कुंडरा ने संयुुक्त ने चंडीघाट जाकर मौका मुआयना किया। अधिशासी अभियंता व अन्य अधिकारी घटनाक्रम की पूरी रिपोर्ट के साथ जिलाधिकारी व एसएसपी से मिलेंगे और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए कार्रवाई का अनुरोध करेंगे।
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काटे गए पेड़ों की कराई फोटाग्राफी
सिंचाई खंड हरिद्वार उप राजस्व अधिकारी एनएस कुंडरा ने बताया कि काटे गए खैर के पेड़ों के ठुंठों की फोटोग्राफी कराई गई है। पुलिस का सहयोग नहीं मिलने की पर जिलाधिकारी व एसएसपी से मिलने का निर्णय लिया गया है। अब तक 44 पेड़ काटे जा चुके हैं। चंडीघाट में अभी 100 से अधिक खैर के पेड हैं। उनकी सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई तो वन माफिया धीरे-धीरे पूरा जंगल साफ कर देंगे। उन्होंने बताया कि पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं करने से आसपास के लोग तथा वन गुर्जर भी डर के कारण कुछ बताने को तैयार नहीं हैं।
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बिजनौर की कत्था फैक्ट्री में जाता है माल
सिंचाई विभाग के अधिकारियों को लगता है कि सीमावर्ती उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में कत्था बनाने की फैक्ट्रियां हैं। हो सकता है कि खैर के पेड़ काटकर कत्था बनाने के लिए माफिया पहुंच रहे हों। सिंचाई विभाग के सूत्रों ने बताया कि पिछली बार खैर की कुछ डाटें लालढांग क्षेत्र में दिखाई भी दी थीं। इसके बावजूद पुलिस ने माल बरामद कर कोई कार्रवाई नहीं की।