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खनन याचिका में पक्षकार बनेगा मातृसदन
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Thu, 06 Apr 2017 11:09 PM IST
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प्रदेश में खनन बंदी के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई विशेष याचिका में मातृसदन भी पक्षकार बनेगा। मातृसदन ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में वकालतनामा भिजवाया है। पत्रकारों से वार्ता करते हुए मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने सरकार के रुख पर भी कड़ी आपत्ति जताई। साथ ही चेतावनी दी कि हाईकोर्ट गंगा को जीवित व्यक्ति का दर्जा दे चुका है, ऐसे में सरकार गंगा में खनन की बात भूल ही जाए।
हाईकोर्ट ने प्रदेश में खनन पर चार महीने के लिए प्रतिबंध लगाया है। प्रदेश सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है। हाईकोर्ट का फैसला आने के तीसरे दिन ही हरिद्वार में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खनन बंद होने से विकास कार्य अवरुद्ध होने का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दाखिल करने का ऐलान किया था। बृहस्पतिवार को मातृसदन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद ने प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने खनन पर रोक लगाते हुए उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने के आदेश दिए हैं तो सरकार को इसमें क्या परेशानी है। स्वामी शिवानंद ने कहा कि गंगा हमारी प्रतिबद्धता है और पर्यावरण रक्षा हमारा कर्तव्य। राजस्व और विकास का बेबुनियाद तर्क देकर मुख्यमंत्री खनन की पैरवी कर रहे हैं। जिससे प्रदेश सरकार और सरकार चलाने वाले संगठन का असली चेहरा खुलकर सामने आ गया है।
स्वामी शिवानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत खनन माफिया का सहयोग करने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की दशा और दिशा पर गौर करें। स्वामी शिवानंद ने खनन को लेकर स्थानीय विधायक स्वामी यतीश्वरांनद पर भी उंगली उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि जो काम पहले हरीश रावत कर रहे थे, वह अब स्वामी यतीश्वरानंद कर रहे हैं। अहंकार का परिणाम सबके सामने हैं। स्वामी शिवानंद ने कहा कि खनन की विभीषिका सिर्फ मैदानी इलाकों में झेलनी पड़ती है। सवाल उठाया कि क्या सरकार हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर में नदियों की खुदाई कर समुद्र बनाना चाहती है। गंगा सहित अन्य नदियों के अस्तित्व के लिए पत्थर होना जरूरी है, जबकि सरकार खनन के रूप में विनाश को बढ़ावा देने में लगी है। उन्होंने कहा कि गंगा में खनन का प्रश्न ही नहीं उठता, हम सुप्रीम कोर्ट में भी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। सरकार की विशेष याचिका में पक्षकार बनने के लिए वकालतनामा भेजा जा चुका है।
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शराब से राजस्व का लालच छोड़े सरकार
स्वामी शिवानंद ने कहा कि सरकार खनन और शराब से राजस्व का हवाला दे रही है। जबकि शराब खुलने से ज्यादा राजस्व उसके बंद होने से प्राप्त हो सकता है।
स्वामी शिवानंद ने सरकार को राजस्व का अर्थ समझाते हुए कहा कि राजस्व सरकार द्वारा जनता से लिया गया वह धन होता है, जिसका उपयोग सरकार को जनता के हित में करना होता है। यदि सरकार शराब बंद करती है तो दुर्घटनाओं, अपराधों, बीमारियों में कमी आएगी और जनता व सरकार को इन मदों में कम खर्च करना पड़ेगा। जिससे शराब खुलने से कहीं ज्यादा राजस्व सरकार को मिलेगा। स्वामी शिवानंद ने कहा कि यदि फिर भी राजस्व की जरूरत होती है तो राज्य सरकार इसके लिए केंद्र सरकार से कई गुना बजट ले सकती है। राजस्व का बहाना बनाकर खनन व शराब को छूट न दे। स्वामी शिवानंद ने नसीहत दी कि हरिद्वार धर्मनगरी और उत्तराखंड धर्म राज्य होने के नाते सरकार भी धर्म पर रहकर कार्य करे।
हाईकोर्ट ने प्रदेश में खनन पर चार महीने के लिए प्रतिबंध लगाया है। प्रदेश सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है। हाईकोर्ट का फैसला आने के तीसरे दिन ही हरिद्वार में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खनन बंद होने से विकास कार्य अवरुद्ध होने का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दाखिल करने का ऐलान किया था। बृहस्पतिवार को मातृसदन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद ने प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने खनन पर रोक लगाते हुए उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने के आदेश दिए हैं तो सरकार को इसमें क्या परेशानी है। स्वामी शिवानंद ने कहा कि गंगा हमारी प्रतिबद्धता है और पर्यावरण रक्षा हमारा कर्तव्य। राजस्व और विकास का बेबुनियाद तर्क देकर मुख्यमंत्री खनन की पैरवी कर रहे हैं। जिससे प्रदेश सरकार और सरकार चलाने वाले संगठन का असली चेहरा खुलकर सामने आ गया है।
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स्वामी शिवानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत खनन माफिया का सहयोग करने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की दशा और दिशा पर गौर करें। स्वामी शिवानंद ने खनन को लेकर स्थानीय विधायक स्वामी यतीश्वरांनद पर भी उंगली उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि जो काम पहले हरीश रावत कर रहे थे, वह अब स्वामी यतीश्वरानंद कर रहे हैं। अहंकार का परिणाम सबके सामने हैं। स्वामी शिवानंद ने कहा कि खनन की विभीषिका सिर्फ मैदानी इलाकों में झेलनी पड़ती है। सवाल उठाया कि क्या सरकार हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर में नदियों की खुदाई कर समुद्र बनाना चाहती है। गंगा सहित अन्य नदियों के अस्तित्व के लिए पत्थर होना जरूरी है, जबकि सरकार खनन के रूप में विनाश को बढ़ावा देने में लगी है। उन्होंने कहा कि गंगा में खनन का प्रश्न ही नहीं उठता, हम सुप्रीम कोर्ट में भी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। सरकार की विशेष याचिका में पक्षकार बनने के लिए वकालतनामा भेजा जा चुका है।
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शराब से राजस्व का लालच छोड़े सरकार
स्वामी शिवानंद ने कहा कि सरकार खनन और शराब से राजस्व का हवाला दे रही है। जबकि शराब खुलने से ज्यादा राजस्व उसके बंद होने से प्राप्त हो सकता है।
स्वामी शिवानंद ने सरकार को राजस्व का अर्थ समझाते हुए कहा कि राजस्व सरकार द्वारा जनता से लिया गया वह धन होता है, जिसका उपयोग सरकार को जनता के हित में करना होता है। यदि सरकार शराब बंद करती है तो दुर्घटनाओं, अपराधों, बीमारियों में कमी आएगी और जनता व सरकार को इन मदों में कम खर्च करना पड़ेगा। जिससे शराब खुलने से कहीं ज्यादा राजस्व सरकार को मिलेगा। स्वामी शिवानंद ने कहा कि यदि फिर भी राजस्व की जरूरत होती है तो राज्य सरकार इसके लिए केंद्र सरकार से कई गुना बजट ले सकती है। राजस्व का बहाना बनाकर खनन व शराब को छूट न दे। स्वामी शिवानंद ने नसीहत दी कि हरिद्वार धर्मनगरी और उत्तराखंड धर्म राज्य होने के नाते सरकार भी धर्म पर रहकर कार्य करे।