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महंत अंबिकापुरी ब्रह्मलीन, संत समाज में शोक की लहर
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तपोनिधि श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के महंत अंबिकापुरी ब्रह्मलीन हो गए। यह खबर मिलते ही संत समाज में शोक की लहर दौड़ गई। संतों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
महंत अंबिकापुरी (80) इन दिनों राजस्थान के डोंगरपुर में अखाड़े के आश्रम में रह रहे थे। वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे। मंगलवार की सुबह को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर शोक जताते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि महंत अंबिकापुरी का निधन संत समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। त्याग व तपस्या की प्रतिमूर्ति ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी संत समाज में बहुत लोकप्रिय थे। जीवन के अंतिम समय तक समाज और देश की सेवा में योगदान दिया। निरंजन पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी संत समाज के प्रेरणास्रोत थे। उनके ब्रह्मलीन होने से संत समाज को गहरा आघात लगा है। आनंद पीठाधीश्वर स्वामी बालकानंद गिरि ने कहा कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षण और धर्म प्रचार में उल्लेखनीय योगदान करने वाले ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी सबकी स्मृतियों में सदैव जीवंत रहेंगे।
निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी व श्रीमहंत रामरतन गिरि ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी तपस्वी संत थे। उनके ब्रह्मलीन होने से निरंजनी अखाड़े को जो क्षति हुई है, उसे कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा। निर्मल पीठाधीश्वर श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह व कोठारी महंत जसविंदर सिंह ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी संत समाज के प्रेरणा स्रोत थे। श्रीमहंत राजेंद्रदास, श्रीमहंत धर्मदास, श्रीमहंत रामकिशोर दास, महंत गोविंद दास, महंत निर्मल दास, महंत दामोदरशरण दास, स्वामी आशुतोष पुरी, स्वामी मधुरवन, स्वामी रविवन, जगद्गुरु स्वामी अयोध्याचार्य, महंत रघुवीर दास, महंत विष्णुदास, स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती, महंत देवानंद सरस्वती, महंत ललितानंद गिरी, स्वामी हरिचेतनानंद ने ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी को दिव्य संत बताते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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महंत अंबिकापुरी (80) इन दिनों राजस्थान के डोंगरपुर में अखाड़े के आश्रम में रह रहे थे। वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे। मंगलवार की सुबह को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर शोक जताते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि महंत अंबिकापुरी का निधन संत समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। त्याग व तपस्या की प्रतिमूर्ति ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी संत समाज में बहुत लोकप्रिय थे। जीवन के अंतिम समय तक समाज और देश की सेवा में योगदान दिया। निरंजन पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी संत समाज के प्रेरणास्रोत थे। उनके ब्रह्मलीन होने से संत समाज को गहरा आघात लगा है। आनंद पीठाधीश्वर स्वामी बालकानंद गिरि ने कहा कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षण और धर्म प्रचार में उल्लेखनीय योगदान करने वाले ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी सबकी स्मृतियों में सदैव जीवंत रहेंगे।
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निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी व श्रीमहंत रामरतन गिरि ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी तपस्वी संत थे। उनके ब्रह्मलीन होने से निरंजनी अखाड़े को जो क्षति हुई है, उसे कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा। निर्मल पीठाधीश्वर श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह व कोठारी महंत जसविंदर सिंह ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी संत समाज के प्रेरणा स्रोत थे। श्रीमहंत राजेंद्रदास, श्रीमहंत धर्मदास, श्रीमहंत रामकिशोर दास, महंत गोविंद दास, महंत निर्मल दास, महंत दामोदरशरण दास, स्वामी आशुतोष पुरी, स्वामी मधुरवन, स्वामी रविवन, जगद्गुरु स्वामी अयोध्याचार्य, महंत रघुवीर दास, महंत विष्णुदास, स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती, महंत देवानंद सरस्वती, महंत ललितानंद गिरी, स्वामी हरिचेतनानंद ने ब्रह्मलीन महंत अंबिकापुरी को दिव्य संत बताते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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