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प्राच्य विद्याओं के उत्थान को जुटेंगे भाषा विशेषज्ञ।
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Thu, 10 Nov 2016 10:54 PM IST
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उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन 12 नवंबर से शुरू होगा। इसमें संस्कृत के साथ ही अंग्रेजी, उर्दू, हिंदी, फारसी आदि भाषाओं के विशेषज्ञ जुटेंगे। सम्मेलन में देश के करीब दो हजार विशेषज्ञ अपने विचार देकर प्रस्ताव तैयार करेंगे।
प्राच्य विद्या सम्मेलन के बारे में पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित ने बताया कि 12 नवंबर से शुरू हो रहे सम्मेलन में पूरे देश से संस्कृत के विद्वानों को आमंत्रित किया गया है। उद्घाटन राज्यपाल डा. केके पॉल करेंगे। इसमें संस्कृत भाषा के सुधार के लिए विचार लिए जाएंगे। इससे पहले हुए 47 सम्मेलनों की देन है कि प्रत्येक राज्य में एक से दो संस्कृत विश्वविद्यालय खोले गए हैं।
बताया कि सम्मेलन में नासा के वैज्ञानिक डा. ओमप्रकाश, अहमदाबाद से प्रो. गौतम भाई पटेल, प्रयाग से डा. हरिदत्त, डा. सरोजा भाटे सहित बड़े विद्वान शामिल होंगे। पूर्व कुलपति प्रो. महावीर अग्रवाल ने बताया कि सम्मेलन की शुरूआत 97 साल पहले पुणे से शुरू हुई थी। इस बार संस्कृत के विद्वान चाहते थे कि सम्मेलन देवभूमि में हो। कहा कि आदि शंकराचार्य का देवभूमि से घनिष्ठ संबंध रहा है। उनके सिद्धांताेंको आगे बढ़ाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। इस मौके पर एआईओसी के महासचिव प्रो. सरोजा भाटे, कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी, पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डा. वाचस्पति कुलवंत आदि शामिल हुए।
प्राच्य विद्या सम्मेलन के बारे में पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित ने बताया कि 12 नवंबर से शुरू हो रहे सम्मेलन में पूरे देश से संस्कृत के विद्वानों को आमंत्रित किया गया है। उद्घाटन राज्यपाल डा. केके पॉल करेंगे। इसमें संस्कृत भाषा के सुधार के लिए विचार लिए जाएंगे। इससे पहले हुए 47 सम्मेलनों की देन है कि प्रत्येक राज्य में एक से दो संस्कृत विश्वविद्यालय खोले गए हैं।
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बताया कि सम्मेलन में नासा के वैज्ञानिक डा. ओमप्रकाश, अहमदाबाद से प्रो. गौतम भाई पटेल, प्रयाग से डा. हरिदत्त, डा. सरोजा भाटे सहित बड़े विद्वान शामिल होंगे। पूर्व कुलपति प्रो. महावीर अग्रवाल ने बताया कि सम्मेलन की शुरूआत 97 साल पहले पुणे से शुरू हुई थी। इस बार संस्कृत के विद्वान चाहते थे कि सम्मेलन देवभूमि में हो। कहा कि आदि शंकराचार्य का देवभूमि से घनिष्ठ संबंध रहा है। उनके सिद्धांताेंको आगे बढ़ाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। इस मौके पर एआईओसी के महासचिव प्रो. सरोजा भाटे, कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी, पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डा. वाचस्पति कुलवंत आदि शामिल हुए।
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