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कालकाजी मंदिर के श्रीमहंत सुरेंद्रनाथ ने की अवधूत ने की राजराजेश्रवराश्रम महाराज से मुलाकात
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नई दिल्ली स्थित श्री कालकाजी मंदिर के श्रीमहंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने मठ मंदिरों को बचाने के लिए संत समाज से एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की है। उन्होंने हरिद्वार के प्रमुख संतों से मुलाकात कर 21 नवंबर को कालकाजी मंदिर में अखिल भारतीय संत समिति के तत्वाधान में आयोजित मठ मंदिर मुक्ति आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया।
श्रीमहंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कनखल स्थित जगद्गुरु आश्रम पहुंचकर शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया और कहा कि हिंदू मठ मंदिरों का शोषण भारत में अनेक वर्षों से होता आ रहा है। राज्य सरकारों द्वारा अधिग्रहित लगभग चार लाख मंदिर मुक्ति की राह देख रहे हैं और सरकारें साधु संतों का शोषण कर मात्र हिंदू मठ मंदिरों को निशाना बनाकर उन पर रिसीवर बैठा रही हैं। उन्होंने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से आग्रह किया कि 21 नवंबर को होने वाले आंदोलन में पहुंचकर संत समाज का मार्गदर्शन करें।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि इसके लिए सरकारों से बातचीत की जाएगी और संत महापुरुषों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी ना हो इसके लिए भी संत समाज एकजुट होगा। श्री दक्षिण काली मंदिर में निरंजनी पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी (निरंजनी) ने श्रीमहंत सुरेंद्रनाथ अवधूत का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया और मठ मदिर मुक्ति आंदोलन को लेकर चर्चा की।
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श्रीमहंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कहा कि दान दक्षिणा से संचालित होने वाले मठ मंदिरों एवं आश्रमों के माध्यम से संत समाज धर्म के संरक्षण संवर्द्धन में अपनी भूमिका निभाता चला आ रहा है। विपरीत परिस्थितियों में संत समाज सरकार के साथ हमेशा खड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि केवल हिंदू मठ मंदिरों का अधिग्रहण करना न्यायसंगत नहीं है। सरकारों को संतों की गरिमा का ध्यान रखते हुए अधिग्रहण वापस लेना चाहिए। उन्होंने ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत साधनानंद आदि संतों से मुलाकात कर उन्हें आंदोलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया।
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श्रीमहंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कनखल स्थित जगद्गुरु आश्रम पहुंचकर शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया और कहा कि हिंदू मठ मंदिरों का शोषण भारत में अनेक वर्षों से होता आ रहा है। राज्य सरकारों द्वारा अधिग्रहित लगभग चार लाख मंदिर मुक्ति की राह देख रहे हैं और सरकारें साधु संतों का शोषण कर मात्र हिंदू मठ मंदिरों को निशाना बनाकर उन पर रिसीवर बैठा रही हैं। उन्होंने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से आग्रह किया कि 21 नवंबर को होने वाले आंदोलन में पहुंचकर संत समाज का मार्गदर्शन करें।
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि इसके लिए सरकारों से बातचीत की जाएगी और संत महापुरुषों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी ना हो इसके लिए भी संत समाज एकजुट होगा। श्री दक्षिण काली मंदिर में निरंजनी पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी (निरंजनी) ने श्रीमहंत सुरेंद्रनाथ अवधूत का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया और मठ मदिर मुक्ति आंदोलन को लेकर चर्चा की।
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श्रीमहंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कहा कि दान दक्षिणा से संचालित होने वाले मठ मंदिरों एवं आश्रमों के माध्यम से संत समाज धर्म के संरक्षण संवर्द्धन में अपनी भूमिका निभाता चला आ रहा है। विपरीत परिस्थितियों में संत समाज सरकार के साथ हमेशा खड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि केवल हिंदू मठ मंदिरों का अधिग्रहण करना न्यायसंगत नहीं है। सरकारों को संतों की गरिमा का ध्यान रखते हुए अधिग्रहण वापस लेना चाहिए। उन्होंने ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत साधनानंद आदि संतों से मुलाकात कर उन्हें आंदोलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया।