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रोडवेज अफसरों की कैसी कुंभकर्णी नींद जो 12 साल बाद भी नहीं टूटी

Wed, 08 Jun 2022 01:03 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jun 2022 01:03 AM IST
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In 12 years, Kumbh came and went but did not break the sleep of roadways
12 साल में कुंभ आकर भी चला गया लेकिन नहीं टूटी रोडवेज की नींद
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चारधाम यात्रा चरम पर है। रोडवेज बसों से रोजाना हजारों श्रद्धालु हरिद्वार से आवाजाही करते हैं। लेकिन रोडवेज अफसरों की हीलाहवाली और कुंभकर्णी नींद से यात्रियों को बसों के संचालन की गलत जानकारी मिल रही है। दरअसल, बस अड्डा परिसर में लगे समयसारिणी बोर्ड 12 साल पुराने हैं। इन सालों में कई बसों के रूट और समय में परिवर्तन हो गया है, लेकिन बस अड्डे पर आज भी पुरानी समयसारिणी और रूट के बड़े-बड़े बोर्ड यात्रियों को गुमराह कर रहे हैं।
12 सालों में तो कुंभ भी दोबारा आकर चला गया। कुंभ मेला 2010 में उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) की हरिद्वार डिपो का विस्तार हुआ था। बस अड्डे पर सुविधाएं बढ़ाते हुए यात्रियों को बसों के सही रूट और समय को लेकर कोई परेशानी न हो, इसके लिए परिसर में बड़े-बड़े डेस्टिनेशन बोर्ड लगाए गए। मंगलवार को अमर उजाला ने बस अड्डे पर यात्री सुविधाओं की पड़ताल की। छानबीन की गई तो पता चला कि बोर्ड 12 साल से बदले ही नहीं गए। बोर्डों पर आज भी 12 साल पुराना बसों का रूट और समय दर्ज है। जबकि इतने सालों के अंदर कई बसों का रूट बदल गया। समय में भी बदलाव हो गया। लेकिन बोर्ड नहीं बदले जा सके। बस अड्डे पर पहुंचने वाले यात्री पहले बोर्ड पर अपने रूट की बसों का समय देखते हैं। इसके बाद उस रूट की बस ढूंढते हैं। लेकिन बोर्ड में गलत जानकारी होने से यात्रियों की फजीहत हो रही है। पूछताछ काउंटर पर कर्मचारी सीधे मुंह बात नहीं करते हैं। आमतौर पर काउंटर से कर्मचारी गायब रहते हैं। यात्रियों को मजबूरन स्टेशन से बाहर पानी और चाय की दुकानों से बसों के रूट और समयसारिणी की जानकारी पूछनी पड़ती है।
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बस अड्डे पर नहीं लगी किराया सूची
बस अड्डे पर किराया सूची तक नहीं लगी है। स्टेशन पर यात्री पूछताछ केंद्र पर किराया पूछने पर कर्मचारी भड़क जाते हैं। परिचालक भी सीधे मुंह बात नहीं करते हैं। इससे मजबूरी में यात्रियों को दूसरे राज्यों की परिवहन निगम की बसों में सवार होना पड़ता है।
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इस तरह बदल गया बसों का समय
बोर्ड पर दिल्ली के लिए वोल्वो और एसी बसों का संचालन हरिद्वार से दर्शाया गया है। जबकि हरिद्वार डिपो से इनका संचालन ही नहीं होता है। ऋषिकेश से ही वोल्वो चलती है। हरिद्वार से एसी बस का संचालन भी नहीं होता। नैनीताल, हल्द्वानी, टनकपुर सहित कई रूटों की बसों के समय में परिवर्तन हो गया। इसी तरह लक्सर रूट पर भी बसों का समय कोई नहीं है।
क्या कहते हैं यात्री
बदरीनाथ से लौटे हैं। आगे बस से रवाना होने के लिए हरिद्वार पहुंचे। यहां बस अड्डे पर समय सारिणी बोर्ड के अनुसार बस का समय दोपहर में था। पर बस नहीं मिली। बाद में मालूम हुआ कि बोर्ड पुराना है। बस शाम को आएगी। सही जानकारी न मिलने से यात्रियों को परेशानी हो रही है। - अतुल मिश्रा
- हिमाचल जाने के लिए बस अड्डे आए। यहां पहले बोर्ड पर बस का समय देखा। लेकिन उस समय बस नहीं मिल पाई। किराये को लेकर भी कोई बोर्ड नहीं लगा हुआ है। अधिकांश बस अड्डों पर किराया सूची भी लगी रहती है, जिससे यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो। - सुरेश

डेस्टिनेशन बोर्ड को लेकर जानकारी नहीं थी। जल्द ही इन्हें बदला जाएगा। किराये में उतार-चढ़ाव होता रहता है, इसलिए किराये का बोर्ड लगाया जाना संभव नहीं है। पूछताछ केंद्र से भी यात्रियों को इसकी जानकारी मिल जाती है। - प्रतीक जैन, सहायक महाप्रबंधक, उत्तराखंड परिवहन निगम हरिद्वार
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