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संस्कृत के बिना भारत की कल्पना संभव नहीं---

Wed, 26 Aug 2020 10:39 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2020 10:39 PM IST
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Imagination of India is not possible without Sanskrit
गुरुकुल विवि में सात दिवसीय संस्कृत महोत्सव में वेबीनार में भाग लेते कुलाधिपति डॉ सत्यपाल व अन्? - फोटो : HARIDWAR
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में ऑनलाइन आयोजित सात दिवसीय संस्कृत महोत्सव के दूसरे दिन मुख्य अतिथि विवि के कुलाधिपति डॉ. सत्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व विघटन की अवस्था में है। संस्कृत भाषा ही विश्व को एकसूत्र में बांधने का सामर्थ्य रखती है।
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विशिष्ट अतिथि केंद्रीय सूक्ष्म लघु कटरी उद्योग मंत्री प्रतापचंद्र षडंगी ने कहा कि संस्कृत के बिना भारत की कल्पना संभव नहीं है। हिमाचल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप अग्निहोत्री ने कहा कि संस्कृत भाषा केवल साहित्य को पढ़ाने का माध्यम न बने, बल्कि आधुनिक विषयों को भी संस्कृत के माध्यम से पढ़ाने की आवश्यकता है। प्राचीन भारतीय ज्ञान विज्ञान को जानने समझने के लिये संस्कृत की पांडुलिपियों के शोध की आवश्यकता पर जोर दिया। गुजरात विश्वविद्यालय के भाषा संकाय निदेशक प्रो. कमलेश, पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. महावीर अग्रवाल ने विचार रखे। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दिनेश भट्ट, प्राच्य विद्या संकाय के अध्यक्ष प्रो. ब्रह्मदेव, डॉ. वेदव्रत, प्रो. सोमदेव शतांशु आदि मौजूद रहे।
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