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हरियाली तीज : झूले डालकर गाए सावन के गीत
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हरियाली तीज पर झूले डालकर झूलती विवाहिताएं ।
- फोटो : HARIDWAR
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पंचपुरी के सभी भागों में श्रवण मास की तीज का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया गया। पुरानी बस्तियों में महिलाओं ने सौभाग्य की कामना करते हुए व्रत रखे। मां पार्वती की पूजा अर्चना घर घर की गई। इसके बाद महिलाओं ने घर आंगन में झूला डालकर सावन और तीज के गीत गाए।
हरियाली तीज की पूर्व रात्रि में सिंधारा पर्व मनाते हुए दामाद भोज हुए। कनखल और ज्वालापुर के सैकड़ों घरों में बेटियों और दामादों ने लोक पर्व का आनंद जमकर उठाया। सिंधारे से अगले दिन बृहस्पतिवार को महिलाओं के व्रत सवेरे से प्रारंभ हो गए थे। तीसरे पहर घेवर मिठाई के बायने घरों के पूजा स्थलों पर निकालकर अपने बुजुर्गों के पास भेजे गए। पार्वती की पूजा के बाद घरों में अनेक प्रकार के पकवान बनाए और मिलकर खाए गए। बच्चों और महिलाओं ने नए नए वस्त्र पहनकर घरों में पड़े झूले भी झूले। अलबत्ता कोरोना के कारण मोहल्लों और कॉलोनियों में काफी कम संख्या में झूले पड़े।
ग्रामीण क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया गया हरियाली तीज
धनौरी। सावन माह में अपनी अलग पहचान रखने वाला त्योहार हरियाली तीज धनौरी क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। इस त्योहार पर हरा रंग, हरी चूड़ियों व मेहंदी का विशेष महत्व है। हरियाली तीज पर कुंवारी कन्याओं ने भी उपवास रखा।
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कस्बे में हरियाली तीज पर्व बृहस्पतिवार को धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने भगवान शिव व पार्वती की विधि विधान से पूजा अर्चना की। इस दौरान सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर पति की लंबी उम्र की कामना की। इसके अलावा अविवाहित लड़कियों ने अच्छे पति की कामना के लिए व्रत रखा। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार यह त्योहार पति के प्रति पत्नी के समर्पण का प्रतीक है। इस दिन गौरी शंकर की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सुहागिनों के व्रत रखने से उनके पति की उम्र लंबी होती है और अविवाहित लड़कियों को अच्छा वर मिल जाता है। तेलीवाला, जस्वावाला, कोटा मुराद नगर, दौलतपुर, औरंगाबाद, खाला टिहरा, डालूवाला खुर्द सहित क्षेत्र के सभी मंदिरों में सुबह से लेकर महिलाओं की भीड़ रही। महिलाओं ने भगवान शिव और पार्वती की पूजा अर्चना की और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। इसके बाद व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना की।
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हरियाली तीज की पूर्व रात्रि में सिंधारा पर्व मनाते हुए दामाद भोज हुए। कनखल और ज्वालापुर के सैकड़ों घरों में बेटियों और दामादों ने लोक पर्व का आनंद जमकर उठाया। सिंधारे से अगले दिन बृहस्पतिवार को महिलाओं के व्रत सवेरे से प्रारंभ हो गए थे। तीसरे पहर घेवर मिठाई के बायने घरों के पूजा स्थलों पर निकालकर अपने बुजुर्गों के पास भेजे गए। पार्वती की पूजा के बाद घरों में अनेक प्रकार के पकवान बनाए और मिलकर खाए गए। बच्चों और महिलाओं ने नए नए वस्त्र पहनकर घरों में पड़े झूले भी झूले। अलबत्ता कोरोना के कारण मोहल्लों और कॉलोनियों में काफी कम संख्या में झूले पड़े।
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ग्रामीण क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया गया हरियाली तीज
धनौरी। सावन माह में अपनी अलग पहचान रखने वाला त्योहार हरियाली तीज धनौरी क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। इस त्योहार पर हरा रंग, हरी चूड़ियों व मेहंदी का विशेष महत्व है। हरियाली तीज पर कुंवारी कन्याओं ने भी उपवास रखा।
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कस्बे में हरियाली तीज पर्व बृहस्पतिवार को धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने भगवान शिव व पार्वती की विधि विधान से पूजा अर्चना की। इस दौरान सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर पति की लंबी उम्र की कामना की। इसके अलावा अविवाहित लड़कियों ने अच्छे पति की कामना के लिए व्रत रखा। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार यह त्योहार पति के प्रति पत्नी के समर्पण का प्रतीक है। इस दिन गौरी शंकर की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सुहागिनों के व्रत रखने से उनके पति की उम्र लंबी होती है और अविवाहित लड़कियों को अच्छा वर मिल जाता है। तेलीवाला, जस्वावाला, कोटा मुराद नगर, दौलतपुर, औरंगाबाद, खाला टिहरा, डालूवाला खुर्द सहित क्षेत्र के सभी मंदिरों में सुबह से लेकर महिलाओं की भीड़ रही। महिलाओं ने भगवान शिव और पार्वती की पूजा अर्चना की और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। इसके बाद व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना की।