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जल्दी ही आधी दुनिया हो जाएगी योग और आयुर्वेदमय
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 27 Aug 2016 10:31 PM IST
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स्वामी रामदेव की पतंजलि योगपीठ का दावा है कि जल्द ही आधी दुनिया योग और आयुर्वेदमय हो जाएगी। विश्व योग दिवस घोषित होने के बाद योग को प्राथमिकता से अपनाया गया है। आकलन है कि दुनिया के प्रत्येक दस में से चार लोग योग और आयुर्वेद में रुचि ले रहे हैं। इरान सहित मुस्लिम देशों में योग के करीब चार सौ सेंटर योग और आयुर्वेद की शिक्षा दे रहे हैं।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने शनिवार को दिव्य योग मंदिर में बताया कि अमेरिका और यूरोपीय देशों में योग को तेजी से अपनाया गया है। फोब्ज मैगजीन के अनुसार अकेले अमेरिका में बीस मिलियन लोग कई पीढ़िय़ों से योग कर रहे है। योग का डंका स्वामी विवेकानंद ने पहली बार बजाया था। अब तो योग दिवस घोषित होने के बाद योग और आयुर्वेद आधे अमेरिका तक पहुंच गए है। वह दिन दूर नहीं जब सारी दुनिया की आधी आबादी योग अपना लेगी।
आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा से एशियावासी ही नहीं बल्कि सारी दुनिया ऊब रही है। आधुनिक चिकित्सा के दुष्परिणाम कई रूपों में सामने आ रहे है। बीमारियों का इलाज करने के बावजूद मरीज मर जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि पांच वर्ष की उम्र से योग आधारित जीवन जिया जाए तो बीमारियां बहुत कम आएगी। जो होगी भी उन्हें आयुर्वेद के सिद्धांतों पर चलते हुए दूर किया जा सकता है।
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आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि भारत सहित दर्जनों देशों में आयुर्वेदिक तथा यूनानी औषधियों का निर्माण बढ़ा है। भारत में तो योग के साथ- साथ आयुर्वेद के प्रति लोगों का रुझान तेजी से फैल रहा है। उन्होंने दावा किया कि योग और आयुर्वेद का सुनहरा भविष्य सामने पड़ा हुआ है।
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पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने शनिवार को दिव्य योग मंदिर में बताया कि अमेरिका और यूरोपीय देशों में योग को तेजी से अपनाया गया है। फोब्ज मैगजीन के अनुसार अकेले अमेरिका में बीस मिलियन लोग कई पीढ़िय़ों से योग कर रहे है। योग का डंका स्वामी विवेकानंद ने पहली बार बजाया था। अब तो योग दिवस घोषित होने के बाद योग और आयुर्वेद आधे अमेरिका तक पहुंच गए है। वह दिन दूर नहीं जब सारी दुनिया की आधी आबादी योग अपना लेगी।
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आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा से एशियावासी ही नहीं बल्कि सारी दुनिया ऊब रही है। आधुनिक चिकित्सा के दुष्परिणाम कई रूपों में सामने आ रहे है। बीमारियों का इलाज करने के बावजूद मरीज मर जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि पांच वर्ष की उम्र से योग आधारित जीवन जिया जाए तो बीमारियां बहुत कम आएगी। जो होगी भी उन्हें आयुर्वेद के सिद्धांतों पर चलते हुए दूर किया जा सकता है।
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आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि भारत सहित दर्जनों देशों में आयुर्वेदिक तथा यूनानी औषधियों का निर्माण बढ़ा है। भारत में तो योग के साथ- साथ आयुर्वेद के प्रति लोगों का रुझान तेजी से फैल रहा है। उन्होंने दावा किया कि योग और आयुर्वेद का सुनहरा भविष्य सामने पड़ा हुआ है।