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गुरु ही शिष्य की समग्रता का आधार: ऋषि रामकृष्ण
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निर्धन निकेतन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ऋषि रामकृष्ण ने कहा है कि अज्ञान का नाश कर ज्ञान का मार्ग दिखाने वाले गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर हैं। गुरु आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समग्रता का आधार हैं।
खड़खड़ी स्थित आश्रम में गुरु पूर्णिमा पर्व पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी ऋषि रामकृष्ण ने कहा कि साधना के मार्ग में आने वाले अवरोधों एवं विक्षोभों के निवाकरण में गुरु का असाधारण योगदान होता है। ब्रह्मलीन स्वामी केशवानंद महाराज महान संत थे। जिन्होंने गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करते हुए संपूर्ण जगत को ज्ञान रूपी प्रकाश से आलोकित किया। बाबा हठयोगी ने कहा कि गुरु ही शिष्य को अंत:करण को जागृत कर ज्ञान की प्रेरणा देते हैं।
पूर्व पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी और महंत शिवानंद भारती ने कहा कि गुरु शिष्य परंपरा ही भारत को महान बनाती है। संतों के तप बल से पूरे विश्व में भारत का एक अलग स्थान है। ब्रह्मलीन स्वामी केशवानंद विलक्षण संत थे। इस दौरान महंत शिवशंकर गिरी, स्वामी राजेंद्रानंद, महंत जसविन्दर सिंह, महंत दुर्गादास, महंत प्रह्लाद दास, महंत प्रेमदास स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, महामण्डलेश्वर स्वामी अनंतानंद महाराज, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, महंत दामोदर दास, महंत सुमित दास, स्वामी केशवानंद, संत जगजीत सिंह, संत मंजीत सिंह मौजूद रहे।
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खड़खड़ी स्थित आश्रम में गुरु पूर्णिमा पर्व पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी ऋषि रामकृष्ण ने कहा कि साधना के मार्ग में आने वाले अवरोधों एवं विक्षोभों के निवाकरण में गुरु का असाधारण योगदान होता है। ब्रह्मलीन स्वामी केशवानंद महाराज महान संत थे। जिन्होंने गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करते हुए संपूर्ण जगत को ज्ञान रूपी प्रकाश से आलोकित किया। बाबा हठयोगी ने कहा कि गुरु ही शिष्य को अंत:करण को जागृत कर ज्ञान की प्रेरणा देते हैं।
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पूर्व पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी और महंत शिवानंद भारती ने कहा कि गुरु शिष्य परंपरा ही भारत को महान बनाती है। संतों के तप बल से पूरे विश्व में भारत का एक अलग स्थान है। ब्रह्मलीन स्वामी केशवानंद विलक्षण संत थे। इस दौरान महंत शिवशंकर गिरी, स्वामी राजेंद्रानंद, महंत जसविन्दर सिंह, महंत दुर्गादास, महंत प्रह्लाद दास, महंत प्रेमदास स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, महामण्डलेश्वर स्वामी अनंतानंद महाराज, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, महंत दामोदर दास, महंत सुमित दास, स्वामी केशवानंद, संत जगजीत सिंह, संत मंजीत सिंह मौजूद रहे।
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