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खाते में साढ़े चार करोड़, कैसे होंगे खर्च?
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अक्सर विकास कार्यों में बजट न होना बाधा बनता है लेकिन हरिद्वार में एक महकमा ऐसा है, जिसके खाते में साढ़े चार करोड़ रुपये हैं। बावजूद इसके वो इसे खर्च ही नहीं कर पा रहा है।
दरअसल, जनपद में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हैं। जिला पंचायत के बैंक खाते में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की रकम पड़ी है लेकिन बोर्ड नहीं होने से वह इसे खर्च ही नहीं कर पा रहा है। प्रशासक के तौर पर जिलाधिकारी विनय शंकर पांडेय के पास जिला पंचायत का चार्ज है। अपर मुख्य अधिकारी एमएस राणा के मुताबिक हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका को लेकर प्रशासकों के नीतिगत फैसले लेने पर रोक लगाई है। गौरतलब है कि जिला पंचायत को इसी साल अक्तूबर में छह करोड़ 36 लाख रुपये राज्य वित्त से मिले थे। इनमें से करीब एक करोड़ रुपये तनख्वाह पर व्यय हो रहे हैं। इतनी ही रकम पुराने और वर्तमान में संचालित विकास कार्यों के भुगतान में खर्च होनी हैं।
क्या कहते हैं लोग
क्षेत्र में कई सड़कों का निर्माण होना है। पंचायत स्तर यह काम किया जा सकते हैं, लेकिन कार्यकाल खत्म हो चुका है। अब चुनाव नहीं हो पा रहे हैं, जिससे सड़कों की स्थिति नहीं सुधर पाई है। - नसीम अंसारी, पूर्व जिपं सदस्य, पदार्था
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क्षेत्र में कई स्थानों पर हैंडपंप लगने हैं। कार्यकाल खत्म होने की वजह से नहीं लग सके। अभी पंचायत चुनाव में देरी हो रही है, जिससे क्षेत्र का विकास भी प्रभावित है। - साधुराम चौहान, पूर्व जिपं सदस्य, धारीवाला
गांव में दो तालाब हैं। उनमें से एक तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य पूरा हो चुका है। दूसरे तालाब का सौंदर्यीकरण नहीं हो पाया है। - नूतन कुमार, पूर्व प्रधान कटारपुर
कोट :
18 मई को बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो गया था। इसके बाद चुनाव होने थे लेकिन किसी कारण निर्वाचन नहीं हो पाया। लिहाजा, बगैर बोर्ड की संस्तुति के अब नए कोई भी विकास कार्य नहीं किए जा रहे हैं। नया बोर्ड आने पर ही विकास कार्य होंगे। - एमएस राणा, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, हरिद्वार
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दरअसल, जनपद में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हैं। जिला पंचायत के बैंक खाते में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की रकम पड़ी है लेकिन बोर्ड नहीं होने से वह इसे खर्च ही नहीं कर पा रहा है। प्रशासक के तौर पर जिलाधिकारी विनय शंकर पांडेय के पास जिला पंचायत का चार्ज है। अपर मुख्य अधिकारी एमएस राणा के मुताबिक हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका को लेकर प्रशासकों के नीतिगत फैसले लेने पर रोक लगाई है। गौरतलब है कि जिला पंचायत को इसी साल अक्तूबर में छह करोड़ 36 लाख रुपये राज्य वित्त से मिले थे। इनमें से करीब एक करोड़ रुपये तनख्वाह पर व्यय हो रहे हैं। इतनी ही रकम पुराने और वर्तमान में संचालित विकास कार्यों के भुगतान में खर्च होनी हैं।
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क्या कहते हैं लोग
क्षेत्र में कई सड़कों का निर्माण होना है। पंचायत स्तर यह काम किया जा सकते हैं, लेकिन कार्यकाल खत्म हो चुका है। अब चुनाव नहीं हो पा रहे हैं, जिससे सड़कों की स्थिति नहीं सुधर पाई है। - नसीम अंसारी, पूर्व जिपं सदस्य, पदार्था
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क्षेत्र में कई स्थानों पर हैंडपंप लगने हैं। कार्यकाल खत्म होने की वजह से नहीं लग सके। अभी पंचायत चुनाव में देरी हो रही है, जिससे क्षेत्र का विकास भी प्रभावित है। - साधुराम चौहान, पूर्व जिपं सदस्य, धारीवाला
गांव में दो तालाब हैं। उनमें से एक तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य पूरा हो चुका है। दूसरे तालाब का सौंदर्यीकरण नहीं हो पाया है। - नूतन कुमार, पूर्व प्रधान कटारपुर
कोट :
18 मई को बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो गया था। इसके बाद चुनाव होने थे लेकिन किसी कारण निर्वाचन नहीं हो पाया। लिहाजा, बगैर बोर्ड की संस्तुति के अब नए कोई भी विकास कार्य नहीं किए जा रहे हैं। नया बोर्ड आने पर ही विकास कार्य होंगे। - एमएस राणा, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, हरिद्वार